सिवनी/ राकेश यादव/ खबर डिजिटल/ शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने का दावा करने वाली सिवनी नगरपालिका की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कचहरी चौक और एलआईसी कार्यालय के आसपास कार्रवाई दिखती है, लेकिन रसूखदारों के क्षेत्रों में प्रशासन की सख्ती ठंडी पड़ जाती है। इससे नगर पालिका की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
दफ्तर से 500 मीटर दूर ‘अदृश्य’ अतिक्रमण
नगरपालिका कार्यालय से महज 500 मीटर दूरी पर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्कूल के मुख्य द्वार के पास वर्षों से अवैध दुकानों का कब्जा है। हर दिन अधिकारियों की नजर के सामने होने के बावजूद यह अतिक्रमण कार्रवाई से बचा हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन गरीबों पर तो सख्ती दिखाता है, लेकिन प्रभावशाली लोगों के सामने चुप्पी साध लेता है।
विद्यार्थियों की सुरक्षा पर मंडराता खतरा
स्कूल खुलने और छुट्टी के समय गेट के सामने भारी अव्यवस्था रहती है। सड़क संकरी हो जाने से बच्चों को जोखिम उठाकर मुख्य मार्ग पार करना पड़ता है। अभिभावकों का कहना है कि किसी बड़े हादसे से पहले प्रशासन को जागना चाहिए। स्कूल परिसरों के आसपास अतिक्रमण हटाना प्राथमिकता होना चाहिए, लेकिन यहां सुरक्षा से ज्यादा ‘दबाव’ प्रभावी नजर आता है।
निजी बस स्टैंड बना जाम का केंद्र
निजी बस स्टैंड परिसर के सामने भी वर्षों से अतिक्रमण कायम है। बसों और यात्रियों के लिए निर्धारित स्थान पर अवैध कब्जों के कारण आए दिन जाम की स्थिति बनती है। आम नागरिकों का आरोप है कि नगरपालिका का अतिक्रमण दस्ता केवल दिखावटी कार्रवाई तक सीमित है।


