सिवनी/मनोज नामदेव/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई योजनाएं चला रही है, लेकिन सिवनी जिले के कई दूरस्थ गांव आज भी इन योजनाओं से कोसों दूर हैं। जिले के जबलपुर बॉर्डर से लगे लखनादौन विधानसभा क्षेत्र के घंसौर जनपद की ग्राम पंचायत नायगांव का मंदिर टोला गंगई इसका ताजा उदाहरण है, जहां कागजों में विकास कार्य पूरे हो चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
रास्तों की दिख रही दुर्दशा
खबर डिजिटल की टीम जब इस गांव तक पहुंची तो रास्ते की दुर्दशा साफ दिखाई दी। गांव तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है, बल्कि एक संकरी पगडंडी ही ग्रामीणों का सहारा है। यह रास्ता इतना खराब है कि वाहन चलाना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों के अनुसार बारिश के दिनों में यही रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे गांव का संपर्क लगभग टूट जाता है।
ग्रामीणों ने दी जानकारी
ग्रामीणों ने बताया कि अगर गांव में कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए तो उसे करीब 3 किलोमीटर तक खटिया में उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। गांव में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था भी नहीं है और ना ही आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहा है।
शिक्षा व्यवस्था अधूरी
गांव में केवल एक प्राथमिक शाला है, जहां आसपास के अलग-अलग टोले के बच्चे पढ़ने आते हैं। लेकिन बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए भी जंगल के बीच से पगडंडी के रास्ते पैदल चलकर आना पड़ता है। यह पूरा इलाका जंगल और नर्मदा नदी के डूब क्षेत्र में आता है, जिससे यहां विकास कार्य और भी मुश्किल हो गए हैं।
शिकायतों को नहीं असर
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जिला कलेक्टर से लेकर राज्य शासन तक शिकायत की है। उनका आरोप है कि गांव में कई निर्माण कार्य कागजों में दिखा दिए गए हैं, लेकिन वास्तविकता में कोई काम नहीं हुआ। इसके बावजूद आज तक किसी प्रकार की जांच नहीं की गई।
समस्याओं से दो-चार
इस पूरे मामले में अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) बिशन सिंह ने कहा कि क्षेत्र काफी दूरस्थ है, और ग्रामीणों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही मामले की जांच कराई जाएगी और गांव में सड़क निर्माण सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।


