शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/ शाहपुरा (डिंडौरी)/ जनपद पंचायत शाहपुरा की ग्राम पंचायत डोंढा में विकास के दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शासन ने ग्रामीणों को घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए करोड़ों की नल-जल योजना स्वीकृत की थी, लेकिन पीएचई विभाग की लापरवाही ने इसे महज एक शोपीस बना दिया है।
करोड़ों खर्च, पर प्यास अब भी बरकरार
लगभग 3000 की आबादी वाले इस गांव में विशाल पानी की टंकी और पाइपलाइन का जाल तो बिछा दिया गया, लेकिन विडंबना देखिए कि ग्रामीणों के नसीब में पानी की एक बूंद तक नहीं आई। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के बाद केवल एक दिन टेस्टिंग के लिए सप्लाई दी गई थी, जिसके बाद से सिस्टम ठप पड़ा है।
झिरिया और खराब हैंडपंपों के भरोसे जीवन
भीषण गर्मी में ग्रामीण प्यास बुझाने के लिए असुरक्षित झिरिया और कुओं पर निर्भर हैं। पूरे गांव में कहने को दो हैंडपंप हैं, जिनमें से एक सालों से बंद है। एकमात्र चालू हैंडपंप पर सुबह से रात तक पानी भरने वालों की लंबी कतारें लगी रहती हैं।
जिम्मेदारों की चुप्पी से बढ़ा आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि जब पानी देना ही नहीं था, तो जनता के करोड़ों रुपए क्यों बर्बाद किए गए? इस मामले में जब पीएचई विभाग के अधिकारियों से संपर्क साधा गया, तो उन्होंने चुप्पी साध ली। अब देखना होगा कि प्रशासन कब इस सफेद हाथी बन चुकी योजना में जान फूंकता है या ग्रामीण यूं ही दूषित पानी पीने को मजबूर रहेंगे।


