कन्हैया नाथ/ खबर डिजिटल/ सीहोर/ मध्य प्रदेश का सुप्रसिद्ध देवी धाम सलकनपुर आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। जहां एक ओर सरकारें स्वच्छ भारत और धार्मिक पर्यटन का ढिंढोरा पीट रही हैं, वहीं आस्था का केंद्र माना जाने वाला यहां का प्राचीन तालाब भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनदेखी का प्रतीक बन चुका है। करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद श्रद्धालुओं को यहां केवल बदबू और गंदगी मिल रही है, जिससे अब जनता का आक्रोश फूट पड़ा है।
आस्था पर भारी पड़ती अव्यवस्था
सलकनपुर के इस प्राचीन तालाब का अपना एक गौरवशाली इतिहास और धार्मिक महत्व रहा है। मान्यता है कि माता के दर्शन से पूर्व श्रद्धालु इस पवित्र कुंड में स्नान कर जल ग्रहण करते थे, जिससे आत्मिक शांति और पुण्य लाभ मिलता था। लेकिन आज की कड़वी हकीकत यह है कि यहां की पवित्रता अब इतिहास के पन्नों तक ही सीमित रह गई है।
गंदगी और शराब की बोतलों का साम्राज्य
वर्तमान में तालाब का पानी इस कदर प्रदूषित हो चुका है कि श्रद्धालु इसके करीब जाने से भी कतराते हैं। पानी काला पड़ चुका है और हवाओं में फैली सड़ांध श्रद्धालुओं को नाक ढंकने पर मजबूर कर देती है। सबसे शर्मनाक तस्वीर यह है कि जहां शराब पूरी तरह प्रतिबंधित होनी चाहिए, उस पवित्र तालाब के पानी में कचरे के साथ शराब की बोतलें तैर रही हैं। यह न केवल प्रशासन की नाकामी है बल्कि करोड़ों भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ भी है।
कागजों पर विकास, जमीन पर भ्रष्टाचार
स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि तालाब के सौंदर्यीकरण और विकास के नाम पर लगभग 11 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर की गई थी। ट्रस्ट द्वारा कुछ निर्माण कार्य जैसे लाल पत्थर लगाना तो हुआ, लेकिन गुणवत्ता की कमी के कारण वह भी कुछ ही समय में उखड़ गया। आरोप है कि काम जमीन पर कम और विभागीय फाइलों में ज्यादा चमक रहा है।
सरपंच के गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में राजनीति और स्थानीय प्रशासन के बीच का द्वंद्व भी सामने आया है। ग्राम पंचायत सलकनपुर की सरपंच मंजू दायमा ने सीधे तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सफाई और निर्माण के नाम पर सरकारी बजट को ठिकाने लगाया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं।
सियासत और प्रशासनिक विफलता
यह क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का गृह क्षेत्र रहा है, जहां विकास की बड़ी-बड़ी बातें की गईं। कांग्रेस नेता गोपाल शर्मा ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब धार्मिक स्थलों पर शराब प्रतिबंधित है, तो ये बोतलें तालाब तक कैसे पहुंचीं?


