श्योपुर/धीरज बालोठिया/खबर डिजिटल/ जिले के ग्रामीण अंचलों में इन दिनों हिरन और नीलगाय के बढ़ते आतंक से किसान खासे परेशान हैं। रन्नोद, तिल्लीपुर चरोंद, अडुसा, नागरगांवड़ा और सोंठवा गांवों में ये वन्यजीव लगातार खेतों में घुसकर चना, मेथी और गेहूं की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
हिरन और नीलगाय का प्रकोप
किसानों के अनुसार, रात के समय हिरन और नीलगाय झुंड में खेतों में प्रवेश कर जाते हैं और कुछ ही घंटों में तैयार फसल को पूरी तरह नष्ट कर देते हैं। किसान कुंदन अकोदिया, लखन वैरवा सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि कई खेतों में चने की फसल पूरी तरह चर ली गई है, जबकि मेथी और गेहूं की फसल की बालियां टूटकर जमीन पर गिर गई हैं। ऐसे में लागत निकालना भी किसानों के लिए मुश्किल हो गया है।
राजस्थान से होते हुए पहुंच रहे मध्यप्रदेश
ग्रामीणों का कहना है कि ये वन्यजीव समीपवर्ती राजस्थान क्षेत्र से होते हुए यहां तक पहुंच रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों में वन क्षेत्र होने के कारण जानवरों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है, लेकिन उन्हें रोकने के लिए अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। किसानों ने अपने स्तर पर खेतों के चारों ओर कंटीली झाड़ियां लगाने, तारबंदी करने और रातभर पहरा देने जैसे उपाय किए, इसके बावजूद समस्या बनी हुई है।
वन विभाग और प्रशासन से की मांग
किसानों ने वन विभाग और प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में नियमित गश्त बढ़ाई जाए तथा सोलर फेंसिंग सहित अन्य प्रभावी इंतजाम किए जाएं, ताकि फसलों को बचाया जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ेगा। श्योपुर के ग्रामीण अंचलों में वन्यजीवों का यह बढ़ता आतंक किसानों के लिए एक गंभीर संकट बनता जा रहा है।


