भोपाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश को बाघों से संरक्षण के मामले में ‘टाइगर स्टेट’ का दर्जा मिला हुआ है। देश में सर्वाधिक बाघों की संख्या रखने वाले ‘टाइगर स्टेट’ मध्यप्रदेश में बाघ संरक्षण की हकीकत पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि शहडोल जिले की जयसिंहनगर वन रेंज में करंट की चपेट में आने से एक बाघ और एक बाघिन की मौत हो गई। इस साल प्रदेश में बाघों की नौवीं मौत है, जबकि बीते पांच वर्षों में अब तक 224 बाघों की मौत हो चुकी है।
सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के दौरान का मामला
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जयसिंहपुर में दो बाघों की मौत के पीछे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की बात निकलकर सामने आई है, जहां पर अवैध तरीके से खेती की जा रही थी। यहां पर जंगली जानवरों से खेतों को बचाने के लिए करंट का तार बिछाया गया था, जोकि वन विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाने के लिए पर्याप्त है। इन्हीं तारों से बाघों की मौत हुई है, वहीं जांच में सामने आया है कि घटना 29 जनवरी की है।
शव को ठिकाने लगाने का था प्रयास
वन विभाग ने बताया कि बाघों की मौत के बाद शवों को ठिकाने लगाने की कोशिश की जा रही थी। जिसकी सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम डॉग स्क्वॉड की मदद से आरोपियों तक पहुंची और उन्हें गिरफ्तार किया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया। इसके अलावा अवैध खेती कर रहे दो किसानों कामता गौड़ और रामचरण गौड़ को भी हिरासत में लिया गया है। इन सभी आरोपियों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
हाईकोर्ट ने भी जताई थी चिंता
बता दें कि 20 जनवरी को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बाघों की बढ़ती मौतों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने बाघ संरक्षण के उपायों पर सवाल उठाए थे और जवाब-तलब किया है। वहीं अब इस मामले की सुनवाई आगामी 11 फरवरी को होगी।


