उमरिया/केजी पांडेय/खबर डिजिटल/ इंदौर में जहरीले और गंदे पानी से हुई घटनाओं का मामला अभी थमा भी नहीं है कि अब वैसी ही चिंताजनक तस्वीरें उमरिया जिले से सामने आ रही हैं। मानपुर विधानसभा क्षेत्र के एक पर्यटन ग्राम में नल-जल योजना होने के बावजूद आदिवासी समुदाय के लोग आज भी नदी-नालों का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। यह पानी न केवल गंदा है बल्कि स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक भी है, जिससे गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही अब तक जस की तस बनी हुई है।
गर्मी के दिनों में भीषण जल संकट
मामला उमरिया जिले के मानपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत मरईखुर्द पंचायत का है, जहां पूरी तरह आदिवासी आबादी निवास करती है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में मजबूरी में गंदे पानी का उपयोग करना पड़ता है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि गर्मी और सूखे के दिनों में भी गांव में भीषण जल संकट बना रहता है।
ग्रामीणों की मजबूरी, अधिकारियों का आश्वासन
ग्रामीणों ने बताया कि शासन द्वारा नल-जल योजना के तहत करीब 62 लाख रुपये की लागत से पाइपलाइन बिछाई गई थी, ताकि घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंच सके। योजना की शुरुआत में केवल एक दिन पानी चलाकर औपचारिक फोटो खिंचवाई गई और उसके बाद योजना को बंद कर दिया गया। एक से डेढ़ साल बीत जाने के बावजूद आज तक ग्रामीणों को इस योजना का लाभ नहीं मिल सका है। नतीजतन लोग आज भी नदी-नालों का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। जब यह मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आया तो प्रशासन ने ठेकेदार और संबंधित विभाग के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
पलीता लगाते नजर आए अधिकारी और कर्मचारी
घर-घर नल से जल पहुंचाने के प्रधानमंत्री के सपने को उमरिया जिले में जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी पलीता लगाते नजर आ रहे हैं। जिले में इस योजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद आज भी आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों तक योजना का वास्तविक लाभ नहीं पहुंच पाया है। यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो दूषित पानी से किसी बड़ी बीमारी के फैलने से इनकार नहीं किया जा सकता।


