MP Nigam Mandal: मध्य प्रदेश में राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति का इंतजार और लंबा होता जा रहा है। पिछले छह सालों से आयोग में नेतृत्व का अभाव है, जिसके कारण महिलाओं से जुड़े कई मामले लंबित हैं। ताजा स्थिति यह है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार द्वारा तय किए गए नामों की घोषणा कोर्ट केस की वजह से अटक गई है।
क्यों अटका है मामला?
दरअसल, आयोग में नियुक्तियों का विवाद साल 2020 से चला आ रहा है। मार्च 2020 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने शोभा ओझा को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था, लेकिन प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद 23 मार्च 2020 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शोभा ओझा की नियुक्ति निरस्त कर दी थी। इस फैसले के खिलाफ शोभा ओझा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और नई नियुक्तियों पर रोक जैसी स्थिति बनी हुई है।
इन नामों पर लग चुकी है मुहर
हालांकि मोहन सरकार ने आयोग के लिए नई टीम की घोषणा कर दी है। रेखा यादव को महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया है। जबकि साधना स्थापक और समीक्षा गुप्ता को सदस्य नियुक्ति किया है।
अब सरकार के पास दो रास्ते!
नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने अब महाधिवक्ता से कानूनी मार्गदर्शन मांगा है। सरकार के सामने अब दो ही विकल्प बचते हैं। कोर्ट में अर्जी लगाकर केस का जल्द निपटारा कराया जाए। या फिर कोर्ट के वर्तमान आदेशों को समझते हुए नियुक्ति प्रक्रिया को तकनीकी रूप से आगे बढ़ाया जाए। राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह भी है कि अगर कोर्ट में मामला पेंचिदा होता है तो सरकार राज्य महिला आयोग की हाल में की गई नियुक्ति को रद्द कर सकती है।


