उज्जैन/खबर डिजिटल/ दीपावली के त्योहार पर उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच वे रविवार को संत नगर चौराहा स्थित अपनी पुरानी पान की दुकान 'स्वर्ग पान' पहुंचे। यहां उन्होंने किसी जनप्रतिनिधि की तरह औपचारिकता निभाने के बजाय पुराने दुकानदार की भूमिका में नजर आए। महापौर ने खुद पान तैयार किए, ग्राहकों को खिलाए और उनके साथ दीपावली की खुशियां बांटीं।
परिचितों से की मुलाकात
दुकान पर पहुंचे महापौर मुकेश टटवाल ने पुराने परिचितों से मुलाकात की और लोगों के साथ बैठकर बातचीत की। इस दौरान कई ग्राहकों ने उन्हें त्योहार की शुभकामनाएं दीं। दुकान पर आने वाले लोगों ने अपनी समस्याएं भी उनके सामने रखीं। महापौर ने कहा कि त्योहार के मौके पर यहां आने से पुराने लोगों से मिलने और उनकी बातें सुनने का अवसर मिलता है।
इसी दुकान से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर
महापौर मुकेश टटवाल ने बताया कि 'स्वर्ग पान' सिर्फ उनकी दुकान नहीं, बल्कि उनके जीवन के संघर्ष और मेहनत से जुड़ी पहचान है। इसी दुकान से उन्होंने अपने राजनीतिक और समाजसेवा के सफर की शुरुआत की थी। परिवार की जिम्मेदारियां निभाने और जीवन का गुजर-बसर करने में भी इस दुकान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने बताया कि महापौर बनने के बाद भी दुकान से उनका रिश्ता खत्म नहीं हुआ है। आज भी वे दुकान का संचालन करते हैं और समय मिलने पर यहां पहुंचते हैं। उनके लिए यह जगह पुराने दिनों और संघर्ष के दौर की यादों से जुड़ी हुई है।
ग्राहकों को अपने हाथों से खिलाया मसाले का पान
दीपावली के अवसर पर महापौर ने दुकान पर आने वाले ग्राहकों को अपने हाथों से मसाले का पान बनाकर खिलाया। उन्होंने बताया कि इस खास पान को तैयार करने में कत्था, चूना, सौंफ, सुपारी, खोपरा, गुलाब कतरी, सुमन कतरी, गुलकंद और चटनी सहित कई सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। मुकेश टटवाल ने कहा कि त्योहार पर दुकान आने से पुराने परिचितों से मुलाकात हो जाती है। लोगों के साथ बातचीत करने और उन्हें अपने हाथों से पान खिलाने में उन्हें खुशी मिलती है।
महापौर के अंदाज की हो रही चर्चा
दीपावली पर मुकेश टटवाल का यह अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा। एक ओर वे शहर के प्रथम नागरिक के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अपनी पुरानी दुकान और उससे जुड़े लोगों के साथ उनका जुड़ाव भी बरकरार है। त्योहार के दिन दुकान पर पहुंचकर पान बनाना और ग्राहकों के साथ समय बिताना उनके पुराने जीवन की झलक दिखाता नजर आया।









