देहरादून/खबर डिजिटल/ भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव को लेकर अपनी पहली सूची जारी कर दी है। सूची सामने आते ही उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में इसके पीछे छिपे संदेश को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के फैसले में संगठन और जमीन पर सक्रिय रहकर काम करने वाले नेताओं को प्राथमिकता देने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
पहले नाम से ही दिखा नेतृत्व का फैसला
बीजेपी की पहली सूची में शामिल नामों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसके पहले नाम की हो रही है। राजनीतिक जानकार इसे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की पसंद और रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। सूची के जरिए यह संदेश देने की कोशिश मानी जा रही है कि राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों के चयन में अब केवल राजनीतिक पहुंच ही नहीं, बल्कि जमीनी काम और संगठन में योगदान भी महत्वपूर्ण होगा।
उत्तराखंड के दलित नेता दिनेश आर्य को दिल्ली भेजने की तैयारी
सूची में उत्तराखंड से दलित नेता दिनेश आर्य का नाम सामने आने की चर्चा है। पिथौरागढ़ जिले से आने वाले दिनेश आर्य ने क्षेत्र में काम शुरू किया था और उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा भी प्राप्त रहा है। बताया जा रहा है कि जब पार्टी स्तर पर उनके कामकाज से जुड़ी जानकारी और फाइल मंगाई गई, तो गांवों तक पेयजल पहुंचाने के काम को उनके प्रमुख योगदानों में गिना गया। यानी राज्यसभा के लिए चयन में केवल राजनीतिक पहचान के बजाय क्षेत्र में किए गए काम और लोगों के बीच पकड़ को भी महत्व दिए जाने की बात सामने आ रही है।
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बाहरी उम्मीदवार के प्रस्ताव को नहीं मिली मंजूरी
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि दिल्ली के कुछ नेताओं की ओर से एक बाहरी उम्मीदवार के नाम की पैरवी की जा रही थी। हालांकि, इस प्रस्ताव को देहरादून और दिल्ली, दोनों स्तरों के शीर्ष नेतृत्व की ओर से मंजूरी नहीं मिली।
इसके बाद जमीन से जुड़े स्थानीय नेता को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ। इसे पार्टी के भीतर उम्मीदवार चयन की बदलती शैली के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
जमीनी नेताओं को राज्यसभा भेजने पर जोर
बीजेपी नेतृत्व अब राज्यसभा के लिए ऐसे चेहरों को आगे बढ़ाने पर जोर दे सकता है, जिनका संगठन और जनता के बीच लंबे समय से सीधा संपर्क रहा है। इससे यह संकेत भी मिल रहा है कि केवल शीर्ष नेताओं की सिफारिश या अचानक सामने आने वाले पैराशूट उम्मीदवारों की भूमिका सीमित हो सकती है। पार्टी की अगली सूची पर भी अब सबकी नजरें टिकी हैं। दूसरी सूची में किन राज्यों और किन नेताओं को जगह मिलती है, इससे बीजेपी की राज्यसभा चुनाव को लेकर पूरी रणनीति और अधिक स्पष्ट हो सकती है।









