आधार कार्ड, वोटर आईडी या दूसरे कई सरकारी दस्तावेज बेहद कम शुल्क में बन जाते हैं, लेकिन पासपोर्ट बनवाने के लिए लोगों को अपेक्षाकृत ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं. हाल ही में केंद्र सरकार ने पासपोर्ट की फीस बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दी है. इसके बाद कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर पासपोर्ट बनवाने की लागत इतनी ज्यादा क्यों है. संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सरकार ने फीस बढ़ाने के पीछे की वजह और इस पर होने वाले खर्च का पूरा ब्यौरा दिया है.
जून 2026 से लागू हुआ नया शुल्क
केंद्र सरकार के मुताबिक जून 2026 में पासपोर्ट सेवाओं की बढ़ती लागत और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से फीस में संशोधन किया गया. इससे पहले भी 1971, 1980, 1993, 2002 और 2012 में पासपोर्ट शुल्क में बदलाव किया जा चुका है. सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों के कारण अब पासपोर्ट तैयार करने की लागत पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है.
किन कामों पर खर्च होती है पासपोर्ट फीस?
सरकार ने बताया कि एक पासपोर्ट तैयार करने से लेकर उसे आवेदक तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में कई तरह के खर्च शामिल होते हैं. सबसे बड़ा खर्च इंडिया सिक्योरिटी प्रेस द्वारा चिप-आधारित ई-पासपोर्ट तैयार करने पर आता है. इसके अलावा पासपोर्ट में आवेदक की जानकारी को सुरक्षित तरीके से प्रिंट करने, पासपोर्ट सेवा केंद्रों के संचालन, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के भुगतान पर भी बड़ी राशि खर्च होती है.
इसके साथ ही पुलिस वेरिफिकेशन के लिए संबंधित विभाग को शुल्क दिया जाता है. पासपोर्ट की डिलीवरी के लिए डाक विभाग और कूरियर सेवाओं का खर्च भी सरकार वहन करती है. वहीं पासपोर्ट कार्यालयों के रखरखाव, तकनीकी अपग्रेड और अन्य प्रशासनिक खर्च भी इसी शुल्क से पूरे किए जाते हैं.
अब कितनी देनी होगी फीस?
फीस संशोधन के बाद 36 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट के लिए अब 2,500 रुपये देने होंगे, जबकि पहले इसकी फीस 1,500 रुपये थी. 60 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट की नई फीस 3,500 रुपये तय की गई है. तत्काल पासपोर्ट बनवाने के लिए अब 5,000 रुपये का शुल्क देना होगा, जो पहले 3,500 रुपये था. वहीं नाबालिगों के पासपोर्ट की फीस 1,000 रुपये से बढ़ाकर 1,750 रुपये कर दी गई है.
सरकार ने क्या दी सफाई?
सरकार का कहना है कि चिप-बेस्ड ई-पासपोर्ट, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और बेहतर डिजिटल सेवाओं के कारण पासपोर्ट तैयार करने की कुल लागत बढ़ी है. इसी वजह से शुल्क में संशोधन करना जरूरी हो गया था, ताकि नागरिकों को अधिक सुरक्षित और आधुनिक पासपोर्ट सेवा उपलब्ध कराई जा सके.









