भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में करेंसी व्यवस्था को और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है. आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को जानकारी दी कि केंद्रीय बैंक अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में पॉलिमर यानी प्लास्टिक के नोट जारी करने की योजना पर काम कर रहा है. यदि सभी तैयारियां तय समय पर पूरी हो जाती हैं, तो जल्द ही भारतीय बाजार में नए तरह के नोट देखने को मिल सकते हैं.
क्या होते हैं पॉलिमर नोट?
पॉलिमर नोट सामान्य कागज से नहीं, बल्कि विशेष प्रकार की सिंथेटिक प्लास्टिक फिल्म से तैयार किए जाते हैं. यह सामग्री काफी मजबूत, लचीली और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाली होती है. इसी फिल्म पर सुरक्षा फीचर्स और डिजाइन के साथ नोटों की छपाई की जाती है. पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में ये नोट जल्दी फटते या खराब नहीं होते, इसलिए इनकी उम्र भी अधिक होती है.
कई देशों में पहले से सफल है यह व्यवस्था
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि दुनिया के कई देशों में पिछले 30 वर्षों से पॉलिमर नोटों का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है. इन देशों के अनुभव बताते हैं कि ऐसे नोट लंबे समय तक चलने के कारण अधिक किफायती साबित होते हैं. खासतौर पर कम मूल्य वर्ग के नोट, जिनका लेनदेन सबसे ज्यादा होता है, उनके लिए पॉलिमर नोट बेहतर विकल्प माने जाते हैं.
उन्होंने कहा कि यदि सभी योजनाएं निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में इन नोटों को चलन में लाने का लक्ष्य रखा गया है.
महंगाई और ब्याज दरों पर भी RBI की नजर
मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद संजय मल्होत्रा ने ब्याज दरों और भविष्य की नीतियों पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि आरबीआई के सभी फैसले आर्थिक आंकड़ों और परिस्थितियों के आधार पर लिए जाएंगे. केंद्रीय बैंक का प्रमुख उद्देश्य खुदरा महंगाई को मध्यम अवधि में 4 प्रतिशत के लक्ष्य के आसपास बनाए रखना है.
उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में मौद्रिक नीति से जुड़े फैसले भी महंगाई, आर्थिक गतिविधियों और अन्य वित्तीय संकेतकों को ध्यान में रखकर ही किए जाएंगे. ऐसे में पॉलिमर नोटों की शुरुआत और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की दिशा में आरबीआई की यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है.









