Sansad Resigns: देश में राज्यसभा चुनाव से पहले और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद पूर्व सीएम ममता बनर्जी को एक बड़ा झटका लगा है। सोमवार को टीएमसी राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र राज्यसभा के सभापति को भेज दिया है।
बंगाल में 58 विधायकों की बगावत के बाद, सांसदों के स्तर पर टीएमसी को लगा यह पहला और सबसे बड़ा झटका है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सुखेंदु शेखर राय को टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी का वफादार और भरोसेमंद माना जाता था। उनका यह इस्तीफा ठीक उस वक्त आया है जब ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी इंडिया गठबंधन की बैठक में शिरकत करने के लिए दिल्ली में ही डेरा डाले हुए हैं।
58 विधायकों ने बनाया नया गुट
बता दें कि टीएमसी के 58 बागी विधायकों ने हाल ही में मुख्य दल से नाता तोड़कर अपना अलग गुट बना लिया है। इस बागी गुट ने विधानसभा में ऋतुब्रत बनर्जी को अपना नया नेता चुन लिया है, जिन्हें ममता बनर्जी ने कुछ समय पहले पार्टी से निष्कासित किया था। इन 58 बागी विधायकों का एक बेहद चौंकाने वाला रुख सामने आया है। उनका कहना है कि उनकी बगावत या लड़ाई टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं है। वे ममता को आज भी अपना नेता मानते हैं। उनकी आपत्ति ममता के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी के पार्टी के अंदर लगातार बढ़ते दखल को लेकर है।
संगठन में किया था बड़ा उलटफेर
विधायकों के इस विद्रोह को दबाने और पार्टी को बिखरने से बचाने के लिए ममता बनर्जी ने पिछले दिनों बड़ा फेरबदल किया था। ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर तो बरकरार रखा, लेकिन उनकी मनमानी को रोकने के लिए उनके साथ दो नए संयुक्त राष्ट्रीय सचिवों की तैनाती कर दी थी। इतना ही नहीं ममता ने अपने पुराने और वफादार चेहरों को आगे भी बढ़ाया। उन्होने चंद्रिमा भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल टीएमसी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था।









