MP Dying Cadre: मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने सरकारी खर्च को कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने कैबिनेट के निर्णय के बाद प्रदेश के 1 लाख 20 हजार से अधिक पदों को डाइंग कैडर घोषित कर दिया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि ये पद अब धीरे-धीरे सरकारी तंत्र से पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे और इन पर नई नियुक्तियां प्रतिबंधित रहेंगी।
इन पदों पर नही होगी भर्ती
सरकार ने अलग-अलग श्रेणियों के हजारों पदों को समाप्त करने का आदेश दिया है। आकस्मिकता निधि में सबसे ज्यादा 55,808 पद खत्म किए गए हैं। वही संविदा और कोटवार श्रेणी वर्ग के 34,497 पद अब डाइंग कैडर में शामिल हैं। कार्यभारित श्रेणी में प्रोजेक्ट आधारित 16,810 पद समाप्त कर दिए गए हैं।
हटेंगेआउटसोर्स कर्मचारी!
सरकार ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर भी बड़ा फैसला लिया है। वर्तमान में नियमित पदों पर काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों को मार्च 2027 तक चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। उनकी जगह पारदर्शी नियमित भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से स्थायी नियुक्तियां की जाएंगी।
नियम तोड़ने वाले पर होगी कार्रवाई
GAD ने चेतावनी दी है कि यदि किसी विभाग के अध्यक्ष या कलेक्टर ने डाइंग कैडर घोषित किए गए पदों पर किसी भी तरह की नई नियुक्ति की, तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य अनावश्यक वित्तीय बोझ को कम करना और केवल नियमित एवं अनिवार्य संविदा पदों पर ही ध्यान केंद्रित करना है।
क्या होते हैं ये पद?
ये पद विशेष रूप से सड़क, सिंचाई या भवन निर्माण जैसे अस्थायी प्रोजेक्ट्स के लिए सृजित किए जाते थे। इनका वेतन किसी निश्चित मद के बजाय अस्थायी आकस्मिक खर्चों के लिए रखी गई निधि से दिया जाता था। ये नियुक्तियां एक निश्चित समय सीमा के अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर होती थीं।









