CM Mohan: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार पर उज्जैन में लगे 168 एकड़ जमीन और 137 प्लॉट की खरीद-फरोख्त के आरोपों ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस पूरे विवाद में विपक्षी नेताओं की घेराबंदी के बीच, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मोहन यादव के पक्ष में बैटिंग करते हुए अपनी ही सहयोगी पार्टी कांग्रेस से अलग लाइन पकड़ ली है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि यह सब किसी विपक्ष की नहीं, बल्कि खुद भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की एक साजिश है, ताकि वे देश के तीन बड़े राज्यों के मुख्यमंत्रियों को कुर्सी से हटा सकें।
क्या पूरा मामला?
दरअसल, दावा किया जा रहा है कि 13 दिसंबर 2023 को मोहन यादव ने जैसे ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, उसके बाद से उनके परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन के कई इलाकों में कम से कम 137 प्लॉट खरीदे। यह पूरा रकबा लगभग 168 एकड़ का बताया जा रहा है। आरोप है कि सिंहस्थ और शहर के मास्टर प्लान के तहत हो रहे विकास कार्यों का फायदा सीधे इन जमीनों को मिला है। हालांकि, इस पड़ताल में चालू वर्ष 2026 की खरीद-बिक्री के आंकड़े शामिल नहीं हैं।
मुख्यमंत्री तो पहले से ही बिल्डर थे
अखिलेश यादव ने अपने एक बयान में कहा है कि मोहन यादव मुख्यमंत्री बनने से पहले से ही रियल एस्टेट और जमीनों के कारोबार में सक्रिय थे, क्या भाजपा यह बात पहले से नहीं जानती थी? असल बात यह है कि बीजेपी अंदरूनी रूप से रास्ता ढूंढ रही है कि कैसे तीन राज्यों के मुख्यमंत्री बदले जाएं। वे मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को इसलिए हटाना चाहते हैं, ताकि उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को हटाने का बहाना मिल सके। अखिलेश ने आगे तंज कसते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता इस बार लोकसभा और आगामी मोर्चों पर साइकिल को इतनी तेजी से दौड़ाएगी कि वहां के मुख्यमंत्री अपने आप ही हट जाएंगे।
राजनैतिक गलियारों में सुगबुगाहट
अखिलेश यादव के इस 3 सीएम वाले बयान के बाद से सियासी नेताओं में हड़कंप देखा जा रहा है। जहां एक तरफ मप्र कांग्रेस इस मुख्यमंत्री का इस्तीफा मांग रही है, वहीं इंडिया गठबंधन के बड़े नेता अखिलेश यादव द्वारा मोहन यादव का बचाव किए जाने से विपक्षी एकता सतह पर आ गई है। अब देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी का केंद्रीय संगठन अखिलेश के इस बयान पर क्या पलटवार करता है।









