भोपाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के संगठन में एक महत्वपूर्ण नियुक्ति की गई है। लंबे समय से खाली पड़े प्रदेश कार्यालय प्रभारी के पद पर आखिरकार डॉ. निशांत खरे को जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इस पद को लेकर पिछले करीब एक साल से संगठन के भीतर कई नामों पर मंथन चल रहा था, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण नियुक्ति लगातार टल रही थी। कार्यकर्ताओं को परेशान होना पड़ रहा था, क्योंकि कार्यालय की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति के हाथ नहीं होने से उनको संपर्क करने में परेशानी हो रही थी।
कई दिग्गजों के नाम थे चर्चा में
प्रदेश कार्यालय प्रभारी के पद के लिए राहुल कोठारी, शैलेंद्र बरुआ, सुमेर सिंह सोलंकी और गौरव रणदिवे के नाम प्रमुखता से सामने आए थे। संगठन में इन नामों को लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चाएं भी हुईं, लेकिन किसी एक नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच लंबे समय तक चली मशक्कत के बाद डॉ. निशांत खरे के नाम पर सहमति बनी।
प्रदेश अध्यक्ष ने राष्ट्रीय नेतृत्व से ली सहमति
जानकारी के मुताबिक, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस नियुक्ति को अंतिम रूप देने से पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से सहमति मांगी थी। इसके बाद 6 नवंबर को डॉ. निशांत खरे की नियुक्ति का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया। खासतौर पर नियुक्ति को लेकर धनतेरस का दिन भी मुहूर्त के अनुसार ही चुना गया, माना जा रहा है कि इसके पीछे भी नए संगठन महामंत्री चंद्रशेखर की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
संगठन में बदल सकते हैं राजनीतिक समीकरण
प्रदेश कार्यालय प्रभारी का पद भाजपा संगठन में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। कार्यालय से जुड़े कामकाज, समन्वय और संगठनात्मक गतिविधियों के संचालन में इस पद की अहम भूमिका होती है। डॉ. निशांत खरे की नियुक्ति के बाद अब प्रदेश कार्यालय में जिम्मेदारियों का नया बंटवारा देखने को मिल सकता है। वहीं, इस फैसले से उन नेताओं की प्रत्यक्ष भूमिका भी प्रभावित होने की संभावना है, जो अब तक कार्यालय से जुड़े कामकाज में सक्रिय थे।
किसके खास डॉ. निशांत खरे?
डॉ. निशांत खरे मूलत: इंदौर के रहने वाले हैं, पेश से वो एक डॉक्टर हैं, जिन्होंने आदिवासियों के बीच जमकर काम किया। उनको इस काम के लिए पू्र्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने चुना था। एक सामान्य डॉक्टर से बीजेपी के प्रदेश कार्यालय प्रभारी के पद पर नियुक्ति तक उनको खरे का गुरु माना जाता है। हालांकि इसमें डॉ. निशांत खरे की मेहनत ने भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। अब देखना होगा कि डॉ. निशांत खरे की नियुक्ति के बाद प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक कामकाज में क्या बदलाव आते हैं।









