मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की 29 अगस्त 2026 को दिल्ली से रीवा की चार्टर्ड फ्लाइट अब सवालों के घेरे में है. यह मामला सीधे तौर पर मुख्यमंत्री या राज्य सरकार की कार्यप्रणाली से जुड़ा सवाल नहीं उठाता, बल्कि उस निजी विमानन व्यवस्था की जांच की जरूरत की ओर इशारा करता है, जिसके जरिए मुख्यमंत्री ने यह यात्रा की थी.
जानकारी के मुताबिक, 29 अगस्त की रात करीब 8:30 बजे मुख्यमंत्री ने दिल्ली से रीवा के लिए निजी चार्टर्ड विमान से उड़ान भरी थी. इस फ्लाइट में पायलट इन कमांड के रूप में कैप्टन एच.एस. विर्डी के नाम का उल्लेख सामने आया है. इसी बिंदु के बाद विमान के पायलट और उससे जुड़ी नियामकीय जानकारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
पायलट के पुराने रिकॉर्ड को लेकर सवाल
कैप्टन एच.एस. विर्डी का नाम पहले भी अनिवार्य Breath Analyzer यानी BA Test से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है. वर्ष 2016 में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कुछ उड़ानों के संदर्भ में BA टेस्ट नहीं होने से संबंधित रिपोर्टों का उल्लेख हुआ था.
इसके बाद 17 फरवरी 2022 को भी BA Test से जुड़े एक मामले में कैप्टन विर्डी के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी. बताया गया कि शुरुआत में उन्हें एक महीने के लिए निलंबित किया गया और बाद में यह अवधि बढ़ाकर तीन महीने कर दी गई.
ऐसे में मुख्य सवाल यह है कि 29 अगस्त की उड़ान से पहले पायलट के पुराने नियामकीय रिकॉर्ड की समीक्षा की गई थी या नहीं. साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उस समय उनकी वैध पात्रता और DGCA से संबंधित रिकॉर्ड क्या स्थिति में था.
विमान ऑपरेटर के रिकॉर्ड पर भी नजर
मुख्यमंत्री की यात्रा में इस्तेमाल हुआ विमान रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा बताया जा रहा है. वहीं, इसे शाश्वत एविएशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से मध्य प्रदेश सरकार के लिए उपलब्ध कराए जाने की जानकारी सामने आई है.
रेडबर्ड एयरवेज से जुड़ा एक अन्य मामला फरवरी 2026 की झारखंड विमान दुर्घटना का है. 23 फरवरी को चतरा जिले के सिमरिया के पास बीचक्राफ्ट C90A विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें सात लोगों की मौत हुई थी. हालांकि किसी ऑपरेटर से जुड़ी दुर्घटना अपने आप उसकी हर दूसरी उड़ान को असुरक्षित साबित नहीं करती. दुर्घटना की वास्तविक वजह जांच रिपोर्ट से ही सामने आती है.
निजी सेवा प्रदाता के चयन पर भी उठे सवाल
शाश्वत एविएशन सर्विसेज से जुड़े निदेशक अरविंद मेहरा को लेकर भी विभिन्न मामलों और कानूनी विवादों से संबंधित दावे सामने आए हैं. यदि ये दावे सही पाए जाते हैं, तो यह जानना जरूरी होगा कि मुख्यमंत्री की चार्टर्ड उड़ान के लिए निजी सेवा प्रदाता चुनते समय उसके संचालकों की पृष्ठभूमि और नियामकीय स्थिति की कितनी जांच की गई.
यहां यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होना अपने आप अपराध साबित नहीं करता. अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होती है.
सुरक्षा मानकों की जांच क्यों जरूरी
मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की हवाई यात्रा में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. इसलिए जरूरत इस बात की है कि 29 अगस्त की चार्टर्ड उड़ान से जुड़े पायलट, विमान और ऑपरेटर के नियामकीय रिकॉर्ड की निष्पक्ष समीक्षा की जाए.
यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी या सुरक्षा मानकों से समझौता सामने आता है, तो जिम्मेदारी तय कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा से जुड़ी इस निजी विमानन व्यवस्था में सभी जरूरी जांच और नियमों का पालन हुआ था या नहीं.









