वैदिक घड़ी पर CM योगी ने की मोहन यादव की तारीफ, बोले - मैं धन्यवाद देता हूं …

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वैदिक घड़ी पर CM योगी ने की मोहन यादव की तारीफ, बोले - मैं धन्यवाद देता हूं …

भोपाल/ खबर डिजिटल/ कालगणना पर आधारित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की खूब सराहना की। CM योगी ने कहा कि भारतीय कालगणना, विक्रम सम्वत् के आधार पर है और हमारी कालगणना की धरती उज्जैन है। इन दोनों का समावेश ही प्राचीन भारतीय परंपरा को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में सहायता करेगा। मैं धन्यवाद देता हूं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को, जिन्होंने प्राचीन कालगणना पर आधारित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी मुझे भेंट की।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विक्रमादित्य महानाट्य मंचन को यादगार क्षण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के "एक भारत-श्रेष्ठ भारत'' के भाव को साकार करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा विश्वनाथ की इस धरा को बाबा महाकाल की धरा से नाट्य मंचन के माध्यम से जोड़ने का विशिष्ट कार्य किया है।

श्री योगी ने भाइयों की जोड़ी का जिक्र करते हुए कहा कि सम्राट विक्रमादित्य और राजा भरथरी की जोड़ी का उल्लेख है। महाराजा ने नाथ संप्रदाय में दीक्षा लेकर काशी की भूमि और चुनार के किले में साधना की थी। सम्राट विक्रमादित्य ने ही आज से दो हजार साल पहले अयोध्या नगरी की खोज की थी और महाराज लव के बाद सबसे पहले भगवान श्री राम के मंदिर का निर्माण करवाया था। सम्राट विक्रमादित्य नीति शास्त्र और न्याय के पर्याय थे।

उ.प्र. के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उज्जैन महाकाल की नगरी है और काशी पंचांग की नगरी है दोनों मिलकर नया इतिहास बनाते हुए प्रेम और सहयोग किया परंपरा मजबूती से आगे बढ़ायेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद श्री मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।

महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व के उन अनछुए पहलुओं को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया, जो उन्हें एक साधारण राजा से ‘चक्रवर्ती सम्राट’ बनाते हैं। वह दृश्य अत्यंत ह्रदय स्पर्शी था जब सम्राट अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए रात्रि के अंधकार में वेश बदलकर निकलते हैं। उनके द्वारा स्थापित 'विक्रम संवत' की प्रासंगिकता और भारतीय काल-गणना के महत्व को जिस सरल और साहित्यिक भाषा में संवादों के माध्यम से पिरोया गया, वह सराहनीय था।

कलाकारों के संवादों में वह ओज और स्पष्टता थी, जिसने इतिहास को मंच पर साक्षात कर दिया। सम्राट का न्याय और 'सिंहासन बत्तीसी' के प्रसंगों ने यह संदेश दिया कि नेतृत्व केवल सत्ता का भोग नहीं, बल्कि त्याग और न्याय की वेदी पर खुद को समर्पित करना है।

तीन दिवसीय महानाट्य की पहली गरिमामयी शाम में जनता और पर्यटक इस कदर उमड़े कि कार्यक्रम स्थल छोटा प्रतीत होने लगा नाटक के चरमोत्कर्ष पर पहुंचतें ही "जय महाकाल" और "सम्राट विक्रमादित्य" के जयकारों से आकाश गुंजायमान हो गया। यह महानाट्य केवल मंचन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ। अंतिम दृश्य में जब सम्राट का राज्याभिषेक हुआ और पुष्प वर्षा हुई, तो हर नागरिक का मस्तक गर्व से ऊंचा हो गया।
कार्यक्रम की समाप्ति के बाद भी देर तक दर्शक उस जादुई वातावरण के प्रभाव में रहे। महानाट्य के सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में भव्यता के साथ प्रस्तुत किया जाए, तो वह आज भी जनमानस को गौरवान्वित करता है। यह महानाट्य आने वाले समय में एक सांस्कृतिक मील का पत्थर साबित होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वाराणसी (काशी) में शुक्रवार को तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के मंचन पर संबोधित करते हुए कहा कि आज बदलते दौर में 2 राज्यों के मध्य सांस्कृतिक संबंध को प्रगाढ़ करने के लिए यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण है। दोनों राज्य विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के आशीर्वाद से दोनों राज्यों को अंतर्राज्यीय केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की सौगात मिली है। यह दोनों राज्यों में सिंचाई, कृषि उत्पादन और पेयजल प्रदाय में सहयोग करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। यह प्रधानमंत्री मोदी का सुशासन भी है, जिसके अंतर्गत राज्यों के बीच परस्पर सहयोग को बढ़ाने की दिशा में कार्य हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सुशासन के इस काल में सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल में स्थापित सुशासन का स्मरण आना स्वभाविक है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्र के स्वाभिमान के सम्राट विक्रमादित्य के राष्ट्र प्रेम, पराक्रम, न्यायप्रियता, प्रजा वात्सल्य और ज्ञान विज्ञान परम्परा की पुनर्स्थापना के गुणों की जानकारी युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए महानाट्य माध्यम बन रहा है। सम्राट विक्रमादित्य के युग का पुनर्स्मरण करने के लिए महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का पहले नई दिल्ली में भी मंचन हुआ है। इस नाटक में अनेक इंजीनियर, डॉक्टर, वकील और अन्य व्यवसायों से जुड़े प्रतिभाशाली व्यक्ति विभिन्न पात्रों के रूप में मंच पर भूमिका निभाते हैं। इससे प्रतिभाओं को तो मंच मिल ही रहा है, एक कुशल शासक के योगदान से देश के नागरिक भी परिचित हो रहे हैं। इस तरह यह महानाट्य लोकरंजन के साथ भारत के गौरवशाली इतिहास को भी आज जीवंत करने में माध्यम बना है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में भाइयों की तीन जोड़ियां प्रसिद्ध हुई हैं। इनमें भगवान श्रीराम और लक्ष्मण, भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के साथ सम्राट विक्रमादित्य और राजा भतृहरि की जोडी शामिल है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने एक करोड़ एक लाख रुपए का सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्रारंभ किया है। एक राष्ट्रीय सम्मान 21 लाख रुपए राशि का और तीन राज्य स्तरीय सम्मान 5-5 लाख रुपए राशि के स्थापित किए गए हैं। वर्ष 2024 में हुए विक्रमोत्सव को सर्वाधिक अवधि वाली धार्मिक- आध्यात्मिक फैस्टिवल का महाद्वीप स्तरीय वॉव अवार्ड भी मिला है। यही नहीं प्रतिष्ठित ईमैक्स ग्लोबल अवार्ड भी विक्रमोत्सव को प्राप्त हुआ है।

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