भोपाल। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया। इस हार के बाद बीजेपी के भीतर समीक्षा शुरू हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी की रणनीति कई स्तरों पर कमजोर साबित हुई।
आइए जानते हैं बीजेपी की हार की तीन बड़ी वजह।
1. टिकट बदलने का फैसला पड़ा भारी
दतिया सीट पर उपचुनाव से पहले पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के चुनाव लड़ने की चर्चा थी। उनके समर्थक भी इसी उम्मीद में तैयारी कर रहे थे। लेकिन अंतिम समय में बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बना दिया।
टिकट बदलने के फैसले से कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली। विरोध में ग्वालियर-झांसी हाईवे पर प्रदर्शन भी हुआ। हालांकि बाद में आंदोलन खत्म हो गया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नाराजगी मतदान तक बनी रही और इसका असर चुनाव परिणाम पर पड़ा।

2. नरोत्तम समर्थकों की निष्क्रियता
दतिया में लंबे समय तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा का मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क रहा है। टिकट नहीं मिलने के बाद उनके कई समर्थक चुनाव प्रचार में पूरी सक्रियता से नजर नहीं आए।
जानकारों का मानना है कि बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की कमी और स्थानीय नेटवर्क के कमजोर पड़ने का सीधा असर मतदान पर पड़ा। इसकी भरपाई के लिए बाहर से कार्यकर्ता बुलाए गए, लेकिन स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी नहीं होने से अपेक्षित फायदा नहीं मिल सका।
3. जातीय समीकरण की रणनीति नहीं आई काम
बीजेपी ने चुनाव में जातीय समीकरण साधने की कोशिश की। यादव और कुशवाह समाज को साधने के लिए बड़े स्तर पर प्रचार अभियान चलाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी चुनाव प्रचार किया और कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
इसके बावजूद पार्टी को इन वर्गों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टिकट बदलाव और संगठन के अंदर असंतोष के कारण जातीय रणनीति भी असरदार साबित नहीं हुई।
हार के बाद शुरू हुई समीक्षा
चुनाव परिणाम आने के बाद बीजेपी ने हार के कारणों की समीक्षा शुरू कर दी है। वहीं कांग्रेस ने इसे जनता का विश्वास और अपनी संगठनात्मक मजबूती का परिणाम बताया है। दतिया उपचुनाव का नतीजा आने वाले चुनावों के लिए दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
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