भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में OBC को 27 फीसदी आरक्षण देने के कानून पर सियासत का बाजार गर्म है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर सबकी नजरें है।
2019 में बनाए गए इस कानून को लागू करने की मांग वाली याचिका पर जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ गुरुवार को सुनवाई करेगी। मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने कानून के पक्ष में अपना समर्थन जाहिर कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया था नोटिस
मध्यप्रदेश में OBC के लिए 27 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए 2019 के कानून पर अमल सुनिश्चित करने की मांग वाली याचिका लगाई गई थी। जस्टिस पी एस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ गुरुवार यानी 11 अक्टूबर को सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर पहले ही नोटिस जारी कर चुका है।
मप्र सरकार का आग्रह स्वीकार
बुधवार को इस मामले पर सुनवाई होनी थी, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले की सुनवाई कल तक टालने का आग्रह किया गया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। मध्यप्रदेश सरकार ने याचिका के समर्थन में बोलते हुए कहा कि नियुक्तियों के एक हिस्से पर जो रोक लगाई गई है, उस पर नियुक्ति करने का अदालत स्पष्ट आदेश दे।
2019 में बढ़ाई थी OBC आरक्षण की सीमा
बता दें कि मध्यप्रदेश सरकार ने 2019 में एक कानून लाकर राज्य में OBC वर्ग के लिए आरक्षण की सीमा 27 फीसदी कर दी थी, लेकिन इस कानून के अमल पर रोक लगने के बाद नियुक्तियों और प्रवेश प्रक्रियाओं पर असर पड़ा था। अब इस कानून को लागू कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। बता दें सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर पहले ही नोटिस जारी कर चुका है। अब गुरुवार को ये तय होगा कि क्या 27% OBC आरक्षण को तुरंत लागू करने का निर्देश दिया जाएगा या नहीं।
जानिये क्या है पूरा मामला
मध्यप्रदेश में फिलहाल OBC को 14% आरक्षण मिलता है, साल 2019 में राज्य सरकार ने इसे बढ़ाकर 27% करने का कानून बनाया था। इसे चुनौती देते हुए कुछ याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में लंबित चल रही हैं। अब अगर सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सकारात्मक आदेश दिया, तो राज्य में नियुक्तियों में रुकी प्रक्रिया दोबारा शुरू हो सकेगी। ये फैसला न सिर्फ मध्यप्रदेश, बल्कि OBC आरक्षण नीति पर राष्ट्रीय स्तर पर भी असर डालेगा और इसका असर बिहार चुनाव में भी दिखाई दे सकता है।









