डिंडौरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी नगर परिषद में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब वार्ड नंबर 15 की भारतीय जनता पार्टी की कर्मठ पार्षद सरस्वती हरिहर पाराशर ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली और लगातार हो रही उपेक्षा से त्रस्त होकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा नगर परिषद अध्यक्ष सुनीता सारस को सौंप दिया है।
"अपनी सरकार में भी नहीं हुई सुनवाई, जनता को क्या मुंह दिखाएं?"
पार्षद सरस्वती हरिहर पाराशर ने आरोप लगाया कि प्रदेश और नगर परिषद दोनों जगह भाजपा की सत्ता होने के बावजूद पिछले चार वर्षों से उनके वार्ड के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। वार्ड में मूलभूत सुविधाओं और विकास के कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। उन्होंने कहा "वार्ड की जनता ने हमें विकास की उम्मीद में वोट दिया था। लेकिन नगर परिषद में हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। विकास कार्य न होने से जनता में भारी आक्रोश है और मुझे लगातार उनके तीखे सवालों और असंतोष का सामना करना पड़ रहा था। ऐसी घुटन और उपेक्षा के बीच पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं रह गया था।"
इस इस्तीफे के बाद डिंडोरी की स्थानीय राजनीति में उबाल आ गया है। कांग्रेस पार्षद ज्योतिरादित्य भलावी ने इस मुद्दे को लपकते हुए भाजपा को आड़े हाथों लिया है। विपक्षी पार्षदों ने कहा कि यह इस्तीफा इस बात का सबूत है कि नगर परिषद में केवल भेदभाव की राजनीति चल रही है। "जब सत्ताधारी दल भाजपा की महिला पार्षद के वार्ड की उपेक्षा हो रही है, तो विपक्षी पार्षदों के वार्डों की क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। नगर परिषद विकास नहीं, बल्कि गुटबाजी का केंद्र बन चुकी है।"
इस पूरे मामले और अपनी ही पार्टी की पार्षद द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर जब डिंडोरी नगर परिषद अध्यक्ष सुनीता सारस से मीडिया ने सवाल किया, तो उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया और कैमरे के सामने चुप रहना ही बेहतर समझा।
डिंडोरी में एक पार्षद का विकास कार्य न होने पर इस्तीफा देना प्रशासनिक अमले और भाजपा संगठन के लिए एक बड़ी किरकिरी साबित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही वार्ड नंबर 15 की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में जन-आक्रोश और ज्यादा बढ़ सकता है।









