डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव / डिंडौरी, करंजिया वन परिक्षेत्र करंजिया के दक्षिण चोरादादर क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के अचानकमार अभ्यारण्य से आए चार हाथियों के दल ने जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने एक ग्रामीण के कच्चे मकान को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया और घर में रखा भारी मात्रा में अनाज खाकर नष्ट कर दिया। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और ग्रामीण रात-रात भर जागकर अपनी सुरक्षा करने को मजबूर हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के अचानकमार अभ्यारण्य की ओर से तीन वयस्क हाथियों और एक शावक (कुल चार हाथी) का दल करंजिया के घने जंगलों में दाखिल हुआ। मंगलवार तड़के यह दल जंगल से निकलकर चोरादादर निवासी रम्मू पिता परसादी के कच्चे मकान के पास पहुंच गया।
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अचानक घर के बाहर हाथियों को देखकर रम्मू और उसका परिवार बुरी तरह घबरा गया। अपनी जान बचाने के लिए पूरा परिवार तुरंत घर से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान की ओर भागा। इसके बाद हाथियों ने मकान पर हमला कर उसे मलबे में तब्दील कर दिया और घर के भीतर संग्रहित करके रखा गया भारी मात्रा में मक्का और धान बिखेर कर खा लिया।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम अलर्ट मोड पर आ गई और हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी बनाए रखी। हाथियों के वापस छत्तीसगढ़ सीमा की ओर लौटने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, लेकिन क्षेत्र में अभी भी सतर्कता बरती जा रही है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी कौशाम्बी झा ने बताया कि हाथियों की आवाजाही को देखते हुए आसपास के गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया जा रहा है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे अकेले जंगल की ओर न जाएं और हाथियों की कोई भी सूचना मिलने पर तुरंत वन विभाग को सूचित करें। प्रभावित परिवार को हुए नुकसान का आकलन कर नियमानुसार मुआवजा राशि प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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मानसून की शुरुआत के साथ ही छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमा से लगे इन जंगलों में हाथियों का आवागमन काफी बढ़ जाता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या से निपटने के लिए वन विभाग को सीमावर्ती जंगलों में एक स्थाई निगरानी व्यवस्था और त्वरित चेतावनी तंत्र विकसित करना चाहिए ताकि जान-माल के नुकसान को रोका जा सके।









