डिंडौरी/खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ Dindori News: डिंडोरी जिले से विकास कार्यों में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। बिजोरा ग्राम पंचायत के दिल्लोपुर गाँव के कछरा टोला में जनपद पंचायत फंड से करीब 8 लाख रुपए की लागत से बना पुल अब अपनी गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल इतना कमजोर है कि लगता है मानसून की पहली बारिश भी नहीं झेल पाएगा।
कछरा टोला के लोगों को बरसात में आने-जाने में बहुत दिक्कत होती थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए जनपद पंचायत ने यहाँ पुल बनाने का काम शुरू कराया। 8 लाख रुपए की लागत से यह पुल हाल ही में बनकर तैयार हुआ। लेकिन काम पूरा होते ही गाँव वालों ने निर्माण पर सवाल खड़े कर दिए।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और अधिकारियों ने मिलकर निर्माण में भारी गड़बड़ी की है। पाइप डालने से पहले नीचे मजबूत बेस नहीं बनाया गया। पाइप के ऊपर कंक्रीट की मोटी परत की जगह मिट्टी डालकर ऊपर से लीपा-पोती कर दी गई। सीमेंट, गिट्टी और सरिया के तय मानक का पालन नहीं किया गया। काम को बिना जाँच के ही पूरा दिखाकर भुगतान लेने की तैयारी है।

गाँव के रहने वाले सुखराम धुर्वे कहते हैं, "यह पुल नहीं, धोखा है। हाथ से मिट्टी हटाओ तो पाइप दिखने लगता है। बारिश में तो यह दो दिन भी नहीं टिकेगा। बच्चों का स्कूल जाना और बीमार को अस्पताल ले जाना मुश्किल हो जाएगा। कछरा टोला से मुख्य सड़क तक जाने का यह एकमात्र रास्ता है। रोज करीब 200 लोग इसी पुल से आते-जाते हैं। ग्रामीणों को डर है कि अगर पुल ढहा तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। बरसात में नाले का पानी बढ़ने पर पुल के बहने का खतरा सबसे ज्यादा है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद जनपद पंचायत अध्यक्ष आशा धुर्वे ने कहा है कि उन्हें ग्रामीणों की शिकायत मिली है। "यह बहुत गंभीर आरोप है। मैंने इंजीनियरों की टीम को तुरंत मौके पर भेजकर जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट 7 दिन में मंगाई गई है। अगर पुल बनाने में कोई कमी या भ्रष्टाचार मिला तो ठेकेदार को काली सूची में डाला जाएगा। साथ ही निर्माण की निगरानी करने वाले उपयंत्री और सहायक यंत्री पर भी कार्रवाई होगी। फिलहाल ठेकेदार का भुगतान रोक दिया गया है।
यह कोई पहला मामला नहीं है जब गाँव में विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठे हों। अक्सर छोटे पुल, सड़क और नाली निर्माण में ऐसी शिकायतें आती रहती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि काम शुरू होने से लेकर पूरा होने तक अगर सही निगरानी न हो तो ठेकेदार लागत बचाने के लिए घटिया काम करते हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि बरसात से पहले पुल को फिर से मजबूत बनाया जाए। अगर पुल को तोड़कर दोबारा बनाना पड़े तो वह भी किया जाए, ताकि लोगों की जान जोखिम में न पड़े। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट के बाद ही साफ होगा कि जिम्मेदार कौन है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।









