झाबुआ/नावेद रजा/खबर डिजिटल/सरकारी मंचों से विकसित भारत की तस्वीर चमकदार दिखाई जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर आदिवासी क्षेत्रों की हकीकत आज भी अलग है। झाबुआ जिले की ग्राम पंचायत मोर्सरिया में वन बत्ती योजना के तहत विद्युत लाइन बिछाई गई, लेकिन यहां केवल एक फल्या तक ही बिजली पहुंचाई गई, जबकि 40 से 50 घर अब भी अंधेरे में हैं।
ग्रामीणों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने कहा कि आधा गांव उजाले में और आधा गांव अंधेरे में है, यह कैसे विकास का मॉडल माना जा सकता है? ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि क्या योजनाओं का लाभ सिर्फ कागजों और टीवी चैनलों तक सीमित रह गया है?
ज्ञापन में ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव के शेष घरों तक बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल एक नया ट्रांसफॉर्मर लगाया जाए तथा बिजली लाइन का विस्तार किया जाए, ताकि सभी घरों को समान रूप से बिजली सुविधा मिल सके।ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्या पर त्वरित कार्रवाई करते हुए गांव के सभी घरों को जल्द बिजली से जोड़ने की पहल करेगा।









