MP Rajya Sabha: मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने जा रहे चुनाव का रण दिलचस्प होता जा रहा है। सोमवार, 8 जून 2026 को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकारों ने सबको चौंकाते हुए एक गुप्त दांव चल दिया है। सूत्रों के मुताबिक, भोपाल के एक प्रतिष्ठित और वरिष्ठ पत्रकार ने भाजपा की ओर से डमी उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है।
बीजेपी ने खेला ब्राह्मण कार्ड!
पार्टी सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, इस डमी नामांकन की कड़ियां सीधे तौर पर जातीय समीकरण और कांग्रेस के असंतोष से जुड़ी हैं। बताया जा रहा है कि डमी प्रत्याशी के तौर पर पर्चा भरने वाले भोपाल के यह नामचीन पत्रकार ब्राह्मण समाज से आते हैं। राजनैतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने इस वर्ग की नाराजगी दूर करने और एक नया समीकरण स्थापित करने के लिए ऐन वक्त पर यह कार्ड खेला है।
क्या है डमी नामांकन की वजह?
दरअसल, डमी नामांकन इसलिए कराया जाता है ताकि यदि किसी तकनीकी खामी, नामांकन जांच या हलफनामे में गलती के कारण मुख्य प्रत्याशियों का पर्चा खारिज हो, तो पार्टी का अधिकृत दावा मजबूत रहे। लेकिन राजनैतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि यह केवल डमी नहीं, बल्कि नामांकन के अंतिम घंटों में कांग्रेस को वॉकओवर न देकर उलझाने की व्यूहरचना भी हो सकती है।
कांग्रेस के लिए अग्निपरीक्षा
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश की विधानसभा सीटों के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा अपनी दो सीटों को जिताने के बाद भी 48 अतिरिक्त वोटों के साथ फायदे में खड़ी है, जबकि कांग्रेस अपनी इकलौती सीट पर मीनाक्षी नटराजन को जिताने के लिए 64 विधायकों का दावा कर रही है।
यह भी बता दें कि 8 जून की दोपहर 3 बजे तक नामांकन पत्र जमा करने का आखिरी वक्त है। इसके बाद साफ हो जाएगा कि पत्रकार महोदय अपना नाम वापस लेते हैं या भाजपा उन्हें तीसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में डटाए रखती है। यदि मैदान में उम्मीदवार तीन से ज्यादा रहते हैं, तो 18 जून 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक विधानसभा में बैलेट पेपर के जरिए मतदान कराया जाएगा, जिसके बाद उसी शाम नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। फिलहाल पत्रकार के इस डमी नामांकन ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के दावों को हकीकत के बेहद करीब लाकर खड़ा कर दिया है। भाजपा के इस पत्रकार कार्ड ने कांग्रेस को रात भर जागने और अपने 64 विधायकों की बाड़ेबंदी करने पर मजबूर कर दिया है।









