खबर डिजिटल कटनी-- ग्राम करहिया में बुधवार को मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के तत्वावधान में ‘शक्ति से सृजन एवं नवांकुर सखी संरक्षण कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं ने कलश यात्रा निकालकर माटी, जल स्रोतों और वृक्षों का पूजन किया तथा प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। हालांकि, ऐसे आयोजनों की वास्तविक सफलता केवल पूजा-पाठ और संकल्प तक सीमित रहने के बजाय गांव में पर्यावरण संरक्षण के ठोस प्रयासों से भी आंकी जानी चाहिए।सेक्टर क्रमांक 3, कन्हवारा के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में जिला समन्वयक डॉ. तेज सिंह केसवाल, ब्लॉक समन्वयक बालमुकुंद मिश्रा, बारडोली वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष आर. एल. चौधरी सहित अन्य पदाधिकारी और ग्रामीण महिलाएं शामिल हुईं। देवी गीतों और भजनों के साथ शुरू हुए कार्यक्रम में जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और वृक्षों की रक्षा का आह्वान किया गया।संकल्प के बाद संरक्षण की असली परीक्षाकार्यक्रम में नारी शक्ति को पर्यावरण संरक्षण की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए महिलाओं से परिवार और समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की गई। संस्था अध्यक्ष आर. एल. चौधरी ने कहा कि जल, माटी और वृक्षों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिक से अधिक पौधे लगाने, जल बचाने और पर्यावरण स्वच्छ रखने पर जोर दिया।लेकिन सवाल यह है कि कार्यक्रम के बाद गांव में जल स्रोतों की सुरक्षा, पौधों की देखरेख, वर्षा जल संचयन और मिट्टी संरक्षण के लिए कौन-से ठोस कदम उठाए जाएंगे? जागरूकता कार्यक्रमों का प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब उनके संदेश को नियमित गतिविधियों और परिणामों में बदला जाएगा।नारी शक्ति की भागीदारी से उम्मीदकार्यक्रम में महिलाओं की सहभागिता को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक पहल माना जा सकता है। अब जरूरत है कि इस भागीदारी को गांव में निरंतर जन-जागरूकता अभियान और व्यावहारिक संरक्षण कार्यों से जोड़ा जाए, ताकि प्रकृति बचाने का संदेश केवल आयोजन तक सीमित न रहे, बल्कि गांव के जीवन का हिस्सा बने
करहिया में प्रकृति संरक्षण का संदेश देकर सिमटा आयोजन, जमीनी बदलाव की पहल पर सवाल
Khabar Digital Desk
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