खबर डिजिटल कटनी--मध्यप्रदेश के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकारों के हक, सम्मान और सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद की कटनी जिला इकाई ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। संगठन के बैनर तले जिलेभर के मीडियाकर्मियों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी को 11 सूत्रीय ऐतिहासिक मांग पत्र सौंपा। परिषद ने दोटूक शब्दों में शासन से मांग की है कि पत्रकारों की बरसों से लंबित समस्याओं का अब त्वरित निराकरण हो और उनके कल्याण के लिए ठोस, व्यावहारिक नीतियां लागू की जाएं।ज्ञापन सौंपते हुए परिषद के जिलाध्यक्ष गोपाल सिंघानिया ने कड़े और भावुक शब्दों में कहा, "पत्रकार अपनी जान हथेली पर रखकर, विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी जनहित के मुद्दों को शासन-प्रशासन के सामने लाते हैं। लेकिन विडंबना देखिए, लोकतंत्र का यह चौथा स्तंभ आज खुद मूलभूत सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक संरक्षण के गहरे अभाव से जूझ रहा है।" उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह इन संवेदनशील मांगों पर बिना देरी किए विचार करे और जल्द से जल्द शासनादेश (जीओ) जारी करे। अधिकारों का घोषणा पत्र: ये हैं वो 11 सूत्रीय प्रमुख मांगें• अधिमान्यता का सरलीकरण: ग्रामीण व तहसील स्तर पर काम करने वाले जांबाज पत्रकारों को भी राज्य स्तरीय अधिमान्यता (Accreditation) का लाभ मिले। इसके लिए अनुभव की बाध्यता को 20 वर्ष से घटाकर सीधे 5 वर्ष किया जाए।• श्रद्धा निधि की उम्र सीमा में कटौती: उम्र के ढलते पड़ाव में पत्रकारों को संबल देने के लिए पत्रकार श्रद्धा निधि (पेंशन) की पात्रता आयु 62 वर्ष से घटाकर 50 वर्ष की जाए। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर व वरिष्ठ पत्रकारों के लिए विशेष सम्मान पेंशन लागू हो।• सख्त पत्रकार सुरक्षा कानून: मैदानी रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों पर होने वाले जानलेवा हमलों, फर्जी मुकदमों, धमकियों और मानसिक उत्पीड़न को रोकने के लिए सूबे में तत्काल एक कड़ा और गैर-जमानती 'पत्रकार सुरक्षा कानून' लागू हो।• ₹8 लाख तक का कैशलेस इलाज: गंभीर बीमारियों के वक्त पत्रकारों को दर-दर न भटकना पड़े, इसलिए पत्रकारों और उनके पूरे आश्रित परिवार को प्रतिवर्ष कम से कम 8 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा अनिवार्य रूप से दी जाए।• दुर्घटना पर ₹10 लाख का सुरक्षा कवच: ऑन-ड्यूटी किसी भी पत्रकार के असामयिक निधन या गंभीर दुर्घटना का शिकार होने पर, उनके बेसहारा परिवार को सरकार की तरफ से न्यूनतम 10 लाख रुपये की त्वरित आर्थिक सहायता दी जाए।• आवासीय कॉलोनी व पत्रकार भवन: जिला मुख्यालयों पर पत्रकारों के लिए सर्वसुविधायुक्त आवासीय कॉलोनियां विकसित की जाएं और बैठकों व प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए भव्य 'पत्रकार भवनों' का निर्माण हो।• पारदर्शी विज्ञापन नीति: कॉर्पोरेट मीडिया के बीच संघर्ष कर रहे छोटे और मध्यम स्तर के स्थानीय समाचार पत्रों को जीवित रखने के लिए एक निष्पक्ष, पारदर्शी और भेदभाव-रहित सरकारी विज्ञापन नीति बनाई जाए।• रियायती बैंक लोन: पत्रकारों और उनके परिवारों को खुद का काम या आशियाना बनाने के लिए आसान शर्तों और बेहद कम ब्याज दरों पर बैंक लोन (Subsidized Loans) मुहैया कराया जाए।• टोल और यात्रा में सम्मानजनक छूट: समाचार संकलन के लिए दिन-रात दौड़ने वाले मीडियाकर्मियों को रेल व बस यात्रा में पुरानी रियायतें बहाल की जाएं और उनके वाहनों को हाईवे टोल टैक्स से पूरी तरह मुक्त रखा जाए।• शिकायत निवारण समितियां: जिला और संभाग स्तर पर 'पत्रकार कल्याण व शिकायत निवारण समितियों' का पुनर्गठन हो, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पत्रकारों की नियमित समीक्षा बैठकें अनिवार्य की जाएं।• एकीकृत डिजिटल व ग्रामीण मीडिया नीति: बदलते दौर के डिजिटल, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकारों को समान प्रोत्साहन, संरक्षण और सम्मान देने के लिए एक 'एकीकृत समग्र कल्याण नीति' का ढांचा तैयार हो। एकजुटता की ताकत: ज्ञापन सौंपने पहुंचे ये प्रमुख चेहरेज्ञापन सौंपने के दौरान कटनी जिला प्रशासन के गलियारे पत्रकारों की एकजुटता से गूंज उठे। जिलाध्यक्ष गोपाल सिंघानिया के नेतृत्व में वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजीव श्रीवास्तव, कृपानंद तिवारी, जिला सचिव मनीष सेकसरिया, संजय शर्मा, संगठन मंत्री प्रमोद खंपरिया, मुख्य प्रवक्ता प्रकाश जैन, सह-प्रवक्ता अरविंद गुप्ता ने अपनी बात मजबूती से रखी।इस दौरान समाज विकास प्रकोष्ठ के मयंक जैन, मनोज प्यासी, बाल्मिक पांडे सहित विजयराघवगढ़ तहसील अध्यक्ष अजय त्रिपाठी, राकेश चतुर्वेदी, सुनील रावत और नीरज अग्रवाल सहित जिले के सैकड़ों प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया के पत्रकार साथी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद ने कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी के जरिए सरकार तक पहुंचाई मैदानी पत्रकारों की आवाज; जिलाध्यक्ष गोपाल सिंघानिया बोले— 'अभावों में जी रहा लोकतंत्र का चौथा स्तंभ, अब ठोस नीति जरूरी'
Khabar Digital Desk
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