सौरभ श्रीवास्तव संवाददाता कटनी-- मुख्यमंत्री Mohan Yadav भले ही कटनी को “माइनिंग कैपिटल” और “स्वर्ण नगरी” बनाने का सपना दिखा रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी अलग नजर आ रही है। जिले में वर्षों से अवैध खनन, ओवरलोडिंग, धूल प्रदूषण और खराब सड़कों से आम जनता परेशान है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या खनिज संपदा का फायदा वास्तव में स्थानीय लोगों को मिलेगा या फिर सिर्फ बड़े उद्योगपतियों और खनन कंपनियों तक ही सीमित रहेगा?कटनी में डोलोमाइट और स्वर्ण अयस्क मिलने की खबरों को सरकार विकास की बड़ी उपलब्धि बता रही है, लेकिन जिन क्षेत्रों में खनन प्रस्तावित है वहां ग्रामीणों के बीच जमीन अधिग्रहण, पर्यावरणीय नुकसान और जल संकट को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। बड़ेरा, बचरबाड़ा और स्लीमनाबाद क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पहले से चल रहे खनन कार्यों ने गांवों की सड़कों को बर्बाद कर दिया है और धूल-धक्कड़ से लोगों का जीना मुश्किल है।सरकार दावा कर रही है कि “माइनिंग कॉन्क्लेव 2.0” से हजारों करोड़ का निवेश आएगा और रोजगार के अवसर बनेंगे, लेकिन स्थानीय युवाओं का सवाल है कि पिछली औद्योगिक परियोजनाओं में कितनों को स्थायी रोजगार मिला? अधिकतर कंपनियों में बाहरी मजदूरों और कर्मचारियों को प्राथमिकता मिलने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं।खनिज राजस्व बढ़ने का दावा भी सवालों के घेरे में है। अगर जिले की आय 100 करोड़ से बढ़कर 160 करोड़ हुई है तो फिर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति क्यों नहीं सुधरी? कई गांव आज भी पेयजल, स्वास्थ्य और सड़क जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं।तकनीक के जरिए अवैध खनन रोकने की बात कही जा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि जिले में रात के अंधेरे में ओवरलोड खनिज वाहनों का संचालन लगातार देखा जाता रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहती है, जबकि खनन माफिया खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खनन का विस्तार बिना मजबूत पर्यावरणीय निगरानी और जनहित योजनाओं के किया गया, तो आने वाले समय में कटनी को गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ सकता है। जंगल, जलस्रोत और कृषि भूमि पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।अब देखने वाली बात होगी कि “स्वर्ण नगरी” का सपना वास्तव में कटनी की जनता के जीवन में खुशहाली लाता है या फिर यह सिर्फ सरकारी घोषणाओं और निवेश सम्मेलनों तक सीमित रह जाता है।
कटनी बनेगा माइनिंग कैपिटल या खनन माफियाओं का गढ़?सोने-डोलोमाइट के सपने, लेकिन जनता पूछ रही सड़क, पानी और पर्यावरण का हिसाब
Khabar Digital Desk
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