दतिया भारतीय जनता पार्टी के नए जिलाध्यक्ष को लेकर बना सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया है. पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने तमाम अटकलों और खींचतान पर विराम लगाते हुए संगठन के पुराने और बेहद अनुभवी चेहरे मानवेंद्र सिंह परिहार के नाम पर अंतिम मोहर लगा दी है. परिहार लंबे समय से बीजेपी से जुड़े रहे हैं और पूर्व में जिला महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. बूथ लेवल से लेकर जिला स्तर तक पार्टी संगठन को खड़ा करने में उनकी अहम भूमिका रही है, जिससे उन्हें स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच एक बेहद मजबूत और भरोसेमंद चेहरा माना जाता है.
नरोत्तम मिश्रा से राजनीतिक दूरी बनी सबसे बड़ा प्लस पॉइंट
राजनीतिक गलियारों में इस बात की जोरों से चर्चा है कि मानवेंद्र सिंह परिहार को पार्टी की कमान मिलना मौजूदा दौर के नए समीकरणों का नतीजा है. परिहार की गिनती उन नेताओं में होती है जिनकी प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा से राजनीतिक दूरियां रही हैं. आज के बदले राजनीतिक माहौल में यही बात उनके लिए सबसे बड़ा प्लस पॉइंट साबित हुई. पार्टी आलाकमान किसी भी तरह की गुटबाजी से परे हटकर एक ऐसे सर्वमान्य नेता की तलाश में था, जो जिले में सभी को एक साथ लेकर चल सके और परिहार इस कसौटी पर बिल्कुल खरे उतरे.
जातीय समीकरण और मजबूत सामाजिक पकड़ का मिला फायदा
दतिया की स्थानीय राजनीति में क्षत्रिय वोट बैंक का हमेशा से बड़ा असर रहा है और परिहार इसी समाज से आते हैं. अंदरूनी सूत्रों की मानें तो प्रदेश प्रभारी और क्षेत्रीय संगठन मंत्री के सजातीय होने का भी उन्हें संगठनात्मक लाभ मिला. इस वजह से सामाजिक और पार्टी स्तर, दोनों जगह उनका पलड़ा काफी भारी नजर आया.
जमीनी कार्यकर्ता के रूप में पहचान, कैडर में भारी उत्साह
जैसे ही परिहार के नाम का ऐलान हुआ, जिले के बीजेपी कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई. पुराने और समर्पित कार्यकर्ता उन्हें अनुशासन और लंबे अनुभव का प्रतीक मान रहे हैं. स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि परिहार किसी दिखावे की राजनीति के बजाय हमेशा जमीनी स्तर पर एक्टिव रहे हैं और कार्यकर्ताओं के सुख-दुख में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहते हैं. संगठन ने उन पर दांव खेलकर यह साफ संदेश दिया है कि जमीनी मेहनत और निष्ठा को पार्टी में हमेशा तरजीह दी जाएगी.









