डेस्क। मध्यप्रदेश बीजेपी में अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक और बीजेपी पिछड़ा वर्ग मोर्चा, गुना के जिला महामंत्री चंद्रपाल किरार (बंटी) ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे ने ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति में नई चर्चा शुरु हो गई है।
तीन साल की उपेक्षा का आरोप
चंद्रपाल किरार ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि पिछले तीन साल से उन्हें लगातार नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि संगठन में उनके स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई गई, जिसके कारण उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया। दरअसल, पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोपों के चलते बीजेपी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस का जवाब देने के बजाय उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया।
सिंधिया और केपी यादव समर्थकों में टकराव
गुना बीजेपी में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और सांसद कृष्णपाल सिंह यादव के समर्थकों के बीच लंबे समय से तनातनी चल रही है। हाल ही में सोशल मीडिया पर दोनों गुटों के बीच बयानबाजी तेज हो गई थी, जिसके बाद कई नेताओं को नोटिस भी जारी किए गए थे। चंद्रपाल किरार का इस्तीफा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि विवाद अब केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संगठन के भीतर असंतोष गहरा रहा है।
ग्वालियर-चंबल में सिंधिया समर्थकों की बेचैनी
कुछ दिन पहले ग्वालियर नगर निगम के पूर्व पार्षद और सिंधिया समर्थक देवेंद्र पाठक ने भी पार्टी से इस्तीफा दिया था। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि बीजेपी में सिंधिया समर्थकों को वह राजनीतिक महत्व नहीं मिल रहा, जो उन्हें कांग्रेस के समय मिलता था। जब ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में थे, तब ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में उनकी सहमति के बिना बड़े राजनीतिक फैसले शायद ही लिए जाते थे। लेकिन बीजेपी में पहले से कई प्रभावशाली नेता मौजूद हैं, जिससे उनके समर्थकों में असहजता बढ़ी है।
क्या संदेश दे रहा है यह इस्तीफा?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक चंद्रपाल किरार का इस्तीफा केवल एक संगठनात्मक घटना नहीं है। यह संकेत है कि ग्वालियर-चंबल में बीजेपी के भीतर विभिन्न गुटों के बीच संतुलन साधना नेतृत्व के लिए चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यदि असंतोष और बढ़ता है, तो इसका असर क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ संगठनात्मक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
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