भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश के आलोट से बीजेपी विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने देशभर के मंदिरों की संपत्ति, जमीन और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए हैं। विधायक ने मंदिरों को सीधे सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग करते हुए उनके बेहतर और पारदर्शी प्रबंधन के लिए एक अलग ‘सनातन बोर्ड’ बनाने का सुझाव दिया है। डॉ. चिंतामणि मालवीय ने सोशल मीडिया पर ‘भारतीय मंदिर संपदा : शोषण और समाधान-एक विवेचन’ शीर्षक से एक वीडियो जारी किया है। इसमें उन्होंने देश के प्रमुख मंदिरों की संपन्नता, मंदिरों को मिलने वाले दान और उनकी संपत्तियों के प्रबंधन पर विस्तार से अपनी बात रखी है।
मंदिरों की संपदा और प्रबंधन पर उठाए सवाल
वीडियो में विधायक चिंतामणि मालवीय ने कहा कि भारतीय संस्कृति में धार्मिक स्थलों और मंदिरों को दान देने की परंपरा सदियों पुरानी है। विभिन्न शासकों और श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के कारण देश के कई प्रमुख मंदिर समय के साथ काफी संपन्न हुए हैं। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के कई बड़े मंदिरों को आज भी हर वर्ष करोड़ों रुपये का दान मिलता है और उनके पास बड़ी मात्रा में संपत्ति व जमीन है। ऐसे में इन संसाधनों के उचित उपयोग और संरक्षण के लिए प्रभावी व्यवस्था की जरूरत है।
बड़े मंदिरों की आय से चल रहे स्कूल और अस्पताल
बीजेपी विधायक ने पद्मनाभस्वामी मंदिर, शिरडी के साईं मंदिर, वैष्णो देवी, सिद्धिविनायक, महाकाल और काशी विश्वनाथ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कई बड़े मंदिरों की आय का उपयोग सामाजिक और जनकल्याण से जुड़े कार्यों में किया जा रहा है। मालवीय का सुझाव है कि मंदिरों की आय का पारदर्शी तरीके से उपयोग कर स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और अस्पताल जैसी संस्थाओं को विकसित किया जा सकता है। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों की सहायता और आर्थिक रूप से कमजोर छोटे मंदिरों के संरक्षण व रखरखाव के लिए भी संसाधनों का उपयोग किया जा सकता है।
मंदिरों की जमीन बचाने के लिए अलग व्यवस्था की वकालत
डॉ. चिंतामणि मालवीय ने मंदिरों की जमीन और संपत्तियों के संरक्षण को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर मंदिरों की जमीनों के प्रबंधन और सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता है। उन्होंने ओडिशा और तमिलनाडु जैसे राज्यों में मंदिर संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं का अध्ययन कर बेहतर मॉडल विकसित करने की बात कही। उनका मानना है कि मंदिरों की जमीन और संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए एक मजबूत और पारदर्शी तंत्र बनाया जाना चाहिए।
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‘सनातन बोर्ड’ बनाने का दिया सुझाव
बीजेपी विधायक ने मंदिरों के प्रबंधन के लिए एक स्वतंत्र सनातन बोर्ड बनाने का प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है कि मंदिरों को सीधे सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर एक ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिसमें धार्मिक, सामाजिक, प्रशासनिक और वित्तीय मामलों का पारदर्शी तरीके से संचालन हो सके। उन्होंने मंदिरों की संपत्ति, दान और जमीन के प्रबंधन में सरकारों की बढ़ती भूमिका पर भी सवाल उठाए। मालवीय ने कहा कि मंदिरों की संपदा के बेहतर उपयोग से शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े स्तर पर जनकल्याणकारी कार्य किए जा सकते हैं।
वक्फ संपत्तियों की व्यवस्था का भी किया जिक्र
अपने वीडियो में चिंतामणि मालवीय ने वक्फ संपत्तियों के नियमन के लिए मौजूद कानूनी व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मंदिरों की संपत्तियों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए भी एक प्रभावी और व्यापक व्यवस्था विकसित किए जाने की जरूरत है। विधायक के इस बयान और ‘सनातन बोर्ड’ के सुझाव के बाद मंदिरों के सरकारी नियंत्रण, धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति और उनके प्रबंधन को लेकर राजनीतिक एवं सामाजिक बहस तेज हो सकती है।
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