भोपाल। मध्य प्रदेश बीजेपी की नई प्रदेश कार्यसमिति को लेकर पार्टी के भीतर खींचतान तेज हो गई है। सीनियर नेताओं के दबाव और गुटबाजी के चलते अब तक प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा नहीं हो सकी है। पार्टी संगठन के भीतर आम राय नहीं बन पाने से मामला लगातार टलता जा रहा है।
प्रदेश कार्यालय की बैठक में भी नहीं हुई चर्चा
गुरुवार को बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में पदाधिकारियों की अहम बैठक हुई। बैठक में प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल मौजूद रहे। हालांकि बैठक में प्रदेश कार्यसमिति को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। बैठक में जिलों की कार्यकारिणी, मोर्चा और प्रकोष्ठों में नियुक्तियों को लेकर मंथन किया गया और जल्द नियुक्तियां करने के निर्देश दिए गए।
सीनियर नेताओं के दबाव में फंसी कार्यसमिति
सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा में सबसे बड़ी बाधा वरिष्ठ नेताओं का दबाव बन रहा है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपने-अपने समर्थकों के नाम संगठन को भेज रखे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ नेताओं ने चार से पांच नामों की सिफारिश की है और लगातार फोन कर अपने करीबियों को शामिल कराने का दबाव बनाया जा रहा है।
भोपाल से दिल्ली तक चल रही लॉबिंग
जानकारी यह भी सामने आई है कि कुछ नेता भोपाल से लेकर दिल्ली तक लॉबिंग में जुटे हुए हैं। प्रदेश स्तर पर सहमति नहीं बनने के कारण मामला केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंच रहा है। यही वजह है कि जिस प्रदेश कार्यसमिति की बैठक ओरछा स्थित राम राजा मंदिर में प्रस्तावित थी, उसकी घोषणा अब तक नहीं हो सकी है।
जून में हो सकती है कार्यसमिति की घोषणा
बीजेपी को अनुशासित और मजबूत संगठन माना जाता है, जहां आमतौर पर समय रहते संगठनात्मक नियुक्तियां पूरी कर ली जाती हैं। लेकिन इस बार पार्टी के भीतर अलग तस्वीर देखने को मिल रही है। वरिष्ठ नेताओं के बीच शक्ति प्रदर्शन और प्रतिनिधित्व की लड़ाई के कारण मामला उलझता जा रहा है। अब पार्टी सूत्रों का कहना है कि जून महीने में प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा की जा सकती है, जिसमें सभी जिलों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश होगी।
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