भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे सोमवार को सामने आने के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में बड़े बदलावों की संभावनाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि अगले एक महीने के भीतर सत्ता और नौकरशाही दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। सबसे अधिक चर्चा मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर है। यदि सभी परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार में यह पहला बड़ा मंत्रिमंडलीय पुनर्गठन होगा। जिसमें उन विधायकों को शामिल किया जा सकता है, जिनके इलाके में पार्टी की स्थिति कमजोर बताई जा रही है।
प्रशासनिक स्तर पर भी फेरबदल की संभावना
सूत्रों के अनुसार केवल मंत्रिमंडल ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में भी नई टीम तैयार की जा सकती है। लंबे समय से इस बदलाव की चर्चा चल रही थी, लेकिन सरकार दतिया उपचुनाव के परिणाम का इंतजार कर रही थी। अब नतीजों के बाद इन संभावित फैसलों पर तेजी से काम होने की संभावना जताई जा रही है। इसमें भी उन अफसरों को तवज्जो मिल सकती है, जोकि आने वाले वक्त में सरकार के लिए ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं।
अगले दो वर्ष सरकार के लिए निर्णायक
प्रदेश सरकार के मौजूदा कार्यकाल के लगभग दो वर्ष शेष हैं। इनमें से भी एक बड़ा हिस्सा सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों और आयोजन में व्यतीत होगा। इसी अवधि में नगरीय निकाय चुनाव भी प्रस्तावित हैं। ऐसे में सरकार अब पूरी तरह चुनावी रणनीति के अनुरूप काम करने की तैयारी में दिखाई दे रही है। भाजपा पिछले करीब 22 वर्षों से (कमल नाथ सरकार के डेढ़ वर्ष के कार्यकाल को छोड़कर) प्रदेश की सत्ता में है। लंबे शासनकाल के कारण सरकार के सामने कई नई चुनौतियां उभर रही हैं, जिनसे निपटना उसके लिए बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
प्रदर्शन के आधार पर होंगे फैसले
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्ष सरकार को घेरने के लिए हर अवसर का उपयोग करेगा। हाल के छात्र आंदोलनों जैसे मुद्दों के बाद प्रदेश में भी विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मोर्चे सक्रिय हो सकते हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ऐसे मंत्रियों को अधिक जिम्मेदारी देना चाहती है, जिनका प्रदर्शन प्रभावी रहा है। वहीं अपेक्षित परिणाम नहीं देने वाले मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है। जिसमें कई वरिष्ठ मंत्रियों का नंबर भी लग सकता है।
प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव संभव
सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढांचे में भी फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में लंबे समय से पदस्थ कुछ अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जा सकती है। ऐसे अधिकारियों को मुख्यधारा से हटाने पर विचार हो सकता है, जिनका कार्य केवल औपचारिक फाइल प्रक्रिया तक सीमित रहा है। मुख्यमंत्री की अपेक्षा है कि अधिकारी जनता से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दें और शासन की योजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर तक दिखाई दे।









