MP Congress: मध्य प्रदेश कांग्रेस और उसके संगठन बिखरते नजर आ रहे हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद जहां एक तरफ मुख्य संगठन में अंतर्कलह मची है, वहीं अब कांग्रेस के छात्र विंग NSUI में भी प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ खुली बगावत देखने को मिली है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देशों की सरेआम अवहेलना करने पर NSUI के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने एक बड़ा एक्शन लेते हुए मध्य प्रदेश के 22 जिला अध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
जीतू पटवारी का था निर्देश
दरअसल, राज्यसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने को लेकर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने पूरे प्रदेश में आक्रामक रुख अपनाने का फैसला किया था। इसके तहत NSUI को निर्देशित किया गया था कि 16 जून को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर इस कार्रवाई के विरोध में उग्र प्रदर्शन किया जाए और पुतला दहन किया जाए।
22 कप्तानों ने फेर लिया मुंह
प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे के माध्यम से यह गाइडलाइन सभी जिलों को भेजी गई थी। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि इंदौर, उज्जैन और बैतूल समेत मध्य प्रदेश के 22 प्रमुख जिलों में एनएसयूआई की तरफ से कोई प्रदर्शन नहीं किया गया और न ही कहीं पुतला दहन हुआ। छात्र संगठन के इन जिलों के पदाधिकारियों ने पीसीसी चीफ के आह्वान से पूरी तरह दूरी बना ली।
सख्त हुए आशुतोष चौकसे
NSUI प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने इसे सीधे तौर पर संगठन विरोधी और पीसीसी चीफ के नेतृत्व को चुनौती माना है। उन्होंने सभी 22 लापरवाह जिला अध्यक्षों को नोटिस थमाते हुए पूछा है कि जब प्रदेश नेतृत्व और पीसीसी चीफ का निर्देश था, तो 16 जून को आपके जिलों में विरोध प्रदर्शन क्यों नहीं आयोजित किया गया?
कुर्सी जाने का खतरा!
सूत्रों का कहना है कि यदि इन जिला अध्यक्षों द्वारा अगले 24 से 48 घंटों के अंदर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो इंदौर, उज्जैन और बैतूल जैसे बड़े सांगठनिक गढ़ों के एनएसयूआई अध्यक्षों को पद से बर्खास्त कर दिया जाएगा।









