भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों ने गोपनीय चरित्रावली (सीआर) व्यवस्था में सुधार की मांग तेज कर दी है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी है, जिससे पदोन्नति और सेवा रिकॉर्ड प्रभावित हो रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का कई विभागों में पालन नहीं किया जा रहा है। यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो कर्मचारी 11 सूत्रीय मांगपत्र सौंपने के साथ आंदोलन शुरू कर सकते हैं।
सरकार से 6 प्रमुख मांगों पर तत्काल फैसला चाहा
कर्मचारी संगठनों ने सरकार से छह अहम मांगों पर जल्द लिखित आश्वासन देने की मांग की है। इनमें पदोन्नति प्रक्रिया पर अस्थायी रोक, सीआर का उसी दिन ऑनलाइन उपलब्ध कराना, कोरोना काल की कम ग्रेडिंग को हटाना, वर्ष 2023-24 और 2024-25 की सीआर का नए मूल्यांकन के आधार पर परीक्षण, कम ग्रेड मिलने पर कर्मचारी को अनिवार्य सूचना देना और पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाना शामिल है।
अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग
संगठनों ने कहा कि केवल नियम बदलना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने दुर्भावनापूर्ण तरीके से सीआर लिखने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। साथ ही बिना सूचना प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज करने वाले अधिकारियों पर वेतनवृद्धि रोकने और आर्थिक दंड लगाने की व्यवस्था लागू करने की भी मांग की गई है।
इन पर विचार नहीं हुआ तो होगा आंदोलन
कर्मचारी संगठनों ने भविष्य के लिए सीआर की लाइव ट्रैकिंग, डाउनलोड सुविधा, अपग्रेडेशन की तय समय-सीमा और ई-फाइल ट्रैकिंग जैसी स्थायी व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिया तो कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। इन सुधारों के लागू होने पर कर्मचारियों को समय पर अपनी सीआर देखने, आपत्ति दर्ज कराने और पदोन्नति से पहले उचित अवसर मिलने की उम्मीद है।









