मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से प्री-मानसूनी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं, लेकिन बारिश की रफ्तार अभी भी उम्मीद से काफी धीमी बनी हुई है. मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 15 जून तक प्रदेश में औसतन 31.9 मिमी वर्षा हो जानी चाहिए थी, जबकि इस बार केवल 22.7 मिमी बारिश ही रिकॉर्ड की गई है. इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 29 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है. प्रदेश के 55 जिलों में से 35 जिलों में वर्षा का स्तर सामान्य से नीचे रहा है. इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, सागर, देवास, धार, विदिशा, खंडवा, खरगोन, रतलाम, बैतूल, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा और बालाघाट जैसे कई जिले इस सूची में शामिल हैं.
कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट
मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश के अनेक जिलों के लिए बारिश और तेज हवा चलने की संभावना जताई है. भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, सीहोर, रायसेन, हरदा, नर्मदापुरम, सागर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पन्ना, टीकमगढ़ और निवाड़ी सहित कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है. वहीं दूसरी तरफ इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर, रतलाम, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, जबलपुर, रीवा, सतना, सीधी और सिंगरौली समेत कई जिलों में तेज धूप निकलने के आसार हैं. इन इलाकों में तापमान बढ़ सकता है और उमस भी महसूस की जा सकती है.
बारिश से मिली गर्मी से राहत
सोमवार को प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और बारिश का असर देखने को मिला. भोपाल और सागर में आधा इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई. इसके अलावा रायसेन, सीहोर, राजगढ़ और छिंदवाड़ा में भी अच्छी वर्षा हुई. बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया और तापमान में गिरावट दर्ज की गई. अधिकतम तापमान की बात करें तो भोपाल में 34.5 डिग्री सेल्सियस, इंदौर में 37.1 डिग्री, उज्जैन में 38 डिग्री, जबलपुर में 38.7 डिग्री और ग्वालियर में 39.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.
मानसून की दस्तक
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है और परिस्थितियां इसके अनुकूल बनी हुई हैं. अनुमान है कि मानसून बालाघाट, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा के रास्ते मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगा. यदि मौसम का मौजूदा पैटर्न बना रहा तो 18 या 19 जून तक मानसून प्रदेश में पहुंच सकता है. मानसून के सक्रिय होते ही बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है. इससे जून महीने में बनी वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है और किसानों को भी राहत मिलने की उम्मीद है. पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025 में मानसून 16 जून को पहुंचा था. वर्ष 2024 में इसकी एंट्री 21 जून को हुई थी, जबकि 2023 में मानसून 24 जून को प्रदेश में पहुंचा था. वहीं 2022 में 16 जून और 2021 में 9 जून को मानसून ने दस्तक दी थी.









