मध्यप्रदेश में साल 2027 में होने वाले नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. आयोग ने साफ कर दिया है कि इस बार चुनाव विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया के बाद तैयार की गई नई मतदाता सूची के आधार पर कराए जाएंगे. इसके लिए भारत निर्वाचन आयोग से जनवरी 2027 में मिलने वाली अंतिम विधानसभा वार वोटर लिस्ट को आधार बनाया जाएगा.
नई मतदाता सूची होगी तैयार
राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के मुताबिक SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो नई मतदाता सूची तैयार होगी, उसी को अंतिम मानते हुए चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी. भारत निर्वाचन आयोग की ओर से नई सूची जारी होने के बाद उसका दोबारा परीक्षण और मिलान किया जाएगा. इसके बाद नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों की प्रक्रिया शुरू होगी.
मतदाता संख्या को लेकर बड़ा अंतर
फिलहाल प्रदेश में मतदाता संख्या को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है. जानकारी के अनुसार भारत निर्वाचन आयोग की SIR प्रक्रिया के बाद तैयार सूची में मध्यप्रदेश में करीब 5.39 करोड़ मतदाता दर्ज किए गए हैं. वहीं राज्य निर्वाचन आयोग की मौजूदा जिलेवार सूची में यह आंकड़ा लगभग 5.96 करोड़ है. दोनों सूचियों में करीब 57 लाख मतदाताओं का फर्क सामने आने से प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है.
SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए
बताया जा रहा है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. जबकि राज्य निर्वाचन आयोग की सूची में अभी भी ऐसे कई नाम मौजूद हैं जिनका सत्यापन और मिलान किया जाना बाकी है. इसी कारण दोनों सूचियों में इतना बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है.
नई सूची मिलने के बाद विस्तृत पुनरीक्षण
हर साल भारत निर्वाचन आयोग 24 जनवरी की स्थिति के अनुसार राज्यों को मतदाता सूची उपलब्ध कराता है. लेकिन इस बार SIR प्रक्रिया लंबी चलने के कारण सूची तय समय पर जारी नहीं हो सकी. अब जनवरी 2027 में नई सूची मिलने के बाद उसका विस्तृत पुनरीक्षण किया जाएगा और फिर अंतिम मतदाता सूची जारी होगी. इसके बाद प्रदेश के 413 नगरीय निकायों और लगभग 23 हजार ग्राम पंचायतों में चुनाव कराने की तैयारी शुरू की जाएगी.
23 अप्रैल से शुरू हो चुका है मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम
मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम 23 अप्रैल से शुरू हो चुका है. इसके तहत 15 से 25 मई तक दावे और आपत्तियां मांगी गई थीं. अब तक करीब 6 हजार आपत्तियां दर्ज हो चुकी हैं, जिनकी जांच और निराकरण की प्रक्रिया जारी है. खास बात यह है कि मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां स्थानीय चुनावों की मतदाता सूची में ऑनलाइन माध्यम से भी दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की सुविधा दी गई है.









