डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी, पैसों का लालच और इंसानियत का पतन जब अपनी सारी सीमाएं लांघ जाता है, तो समाज के सामने एक ऐसी खौफनाक तस्वीर आती है जो हर किसी की रूह कंपा देती है। डिंडौरी जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित ग्राम बड़ी बिछिया से एक ऐसी ही दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां महज 1,000 रूपयें के मामूली विवाद में एक पति ही अपनी पत्नी का हत्यारा बन बैठा। जिस जीवनसाथी के साथ जिंदगी भर साथ निभाने के वादे किए थे, उसी के हाथों मिली बेरहम मारपीट ने एक महिला की हत्या कर दी।
हैवान बना पति, ममता पर भारी पड़ा लालच
घटना की शुरुआत एक बेहद सामान्य घरेलू बात से हुई थी। मृतका रामकली बनवासी के बेटे सोनू बनवासी ने अपनी मां को घर के राशन और जरूरी खर्चों को चलाने के लिए बड़े जतन से ₹1,000 दिए थे। एक मां के लिए वे पैसे पूरे महीने के चूल्हे-चौके का सहारा थे, लेकिन आरोपी पति पप्पू बनवासी की नीयत उस रकम पर टिकी थी।
04 अगस्त 2026 की मनहूस रात आरोपी पप्पू अपनी पत्नी से वह पैसे छीनने की कोशिश करने लगा। जब रामकली ने घर के खर्चों का वास्ता देकर पैसे देने से इनकार किया, तो आरोपी का गुस्सा हैवानियत में बदल गया। उसने अपनी ही पत्नी पर लात-घूंसों से अंधाधुंध हमला कर दिया। रामकली चीखती-चिल्लाती रही ।मगर उस की सुध लेने वाला कोई नहीं था।
तिल्ली फटी, अंदर ही अंदर बहता रहा खून
घटना के बाद आरोपी पति ने पूरे मामले को सामान्य और प्राकृतिक मौत का रूप देकर छिपाने की पूरी कोशिश की। जब पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, तो मेडिकल रिपोर्ट ने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए।
डॉक्टरों की जांच में पता चला कि आरोपी द्वारा किए गए बेरहम वार से महिला के शरीर का आंतरिक हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था। मारपीट के कारण उसकी तिल्ली फट गई थी। शरीर के अंदरूनी हिस्से में लगातार खून बहता रहा, और गंभीर चोटों से उपजे असहनीय दर्द से तड़प-तड़पकर रामकली ने दम तोड़ दिया।
कानून के शिकंजे में आरोपी, भेजा गया जेल
इस दर्दनाक वारदात के बाद कोतवाली पुलिस ने तत्परता दिखाई। आरोपी द्वारा फैलाए गए झूठ और गुमराह करने की कोशिशों को वैज्ञानिक साक्ष्यों व कड़ाई से की गई पूछताछ के जरिए ध्वस्त कर दिया गया। पुलिस ने आरोपी पप्पू बनवासी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित गंभीर धाराओं के तहत अपराध पंजीकृत किया।
अदालती आदेश
आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे उसकी इस अमानवीय करतूत के लिए न्यायिक अभिरक्षा में सीधे जेल भेज दिया गया है।
यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं है, बल्कि समाज के उस काले पहलू को उजागर करती है जहां चंद रुपयों के लिए किसी का जीवन छीन लिया जाता है। रामकली की तड़प और उसकी असामयिक मौत आज हर संवेदनशील दिल से सवाल पूछ रही है कि आखिर रिश्तों की मर्यादा और इंसानियत इतनी सस्ती क्यों हो गई?









