खबर digital News रिपोर्टर /कटनी --क्या शहर में कॉलोनाइजरों के लिए कानून कोई मायने नहीं रखता? क्या पार्क और जनसुविधाओं के लिए छोड़ी गई जमीन भी अब बेचने का धंधा बन चुकी है? कटनी नगर निगम की ताजा कार्रवाई ने ऐसे ही कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।नगर निगम आयुक्त तपस्या परिहार के सख्त रुख के बाद शहर में भूमाफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय वार्ड (खिरहनी) में पार्क के लिए आरक्षित सरकारी भूमि पर कथित रूप से अवैध निर्माण और प्लॉट बेचने के मामले में कॉलोनाइजर नीलेश कुमार चौदहा के खिलाफ थाना एनकेजे में नामजद एफआईआर दर्ज कराई गई है।निगम की जांच में सामने आया कि वर्ष 2003 में स्वीकृत कॉलोनी लेआउट के अनुसार लगभग 4400 वर्गफुट भूमि पार्क एवं सार्वजनिक जनसुविधाओं के लिए आरक्षित थी। लेकिन आरोप है कि इसी जमीन पर चार मकान खड़े कर दिए गए। इतना ही नहीं, आरक्षित भूमि के दो हिस्सों की रजिस्ट्री कर उन्हें बेच भी दिया गया, जबकि शेष दो मकान अब भी कथित रूप से कॉलोनाइजर के कब्जे में हैं।यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि शहरवासियों के अधिकारों पर सीधा हमला माना जा रहा है। जिस जमीन पर बच्चों के खेलने, हरियाली और सार्वजनिक सुविधा की व्यवस्था होनी चाहिए थी, वहां कथित तौर पर निजी निर्माण कर लाभ कमाने का आरोप सामने आया है।नगर निगम ने इस पूरे मामले को मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 292-ग के तहत गंभीर और दंडनीय अपराध मानते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल एफआईआर तक कार्रवाई सीमित रहेगी या अवैध निर्माणों पर बुलडोजर भी चलेगा? और क्या ऐसे अन्य कॉलोनाइजरों की भी जांच होगी जिन्होंने शहर के मास्टर प्लान और जनसुविधाओं की जमीन पर कब्जा किया है?नगर निगम आयुक्त ने साफ संदेश दिया है कि शहर की सार्वजनिक जमीन पर कब्जा करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। यदि यह अभियान लगातार जारी रहा तो अवैध कॉलोनियों और भूमाफियाओं पर आने वाले दिनों में और भी बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
कटनी से सौरभ श्रीवास्तव की रिपोर्ट









