मीडिया गुरु और वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय पुष्पेंद्र पाल सिंह ‘पीपी सर’ Pushpendra Pal Singh PP Sir के विराट व्यक्तित्व की तुलना आसान नहीं है। मीडिया, जनसंपर्क और पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी मानने वाले पीपी सर के अद्वितीय व्यक्तित्व में सूर्य के समान के समान तेज और चंद्रमा के समान शीतलता नजर आती है। वे सबकी बेहतरी के लिए काम करते थे। पीपी सर के व्यक्तित्व पर कहीं कोई दाग नजर नहीं आता।
वे आकाशवाणी और दूरदर्शन के कार्यक्रमों में शासन की नीतियों और जटिल से जटिल विषयों को तथ्यों के साथ बड़ी सहजता से सामने रखते थे। यह बात पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), भोपाल के डायरेक्टर मनीष गौतम ने पीपी सर की जयंती PP Sir Jayanti के अवसर पर आयोजित ‘एक स्मृति... एक विरासत... एक आगाज’ कार्यक्रम में कही। गुरुवार को दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय Dushyant Museum Bhopal में पीपी सर के व्यक्तित्व, विचारों और पत्रकारिता में उनके योगदान का पुण्य स्मरण किया गया। इस अवसर पर पुष्पेंद्र पाल सिंह फाउंडेशन, भोपाल की औपचारिक शुरुआत और वेबसाइट का अनावरण भी किया गया। इस दौरान सभी ने पीपी सर की विरासत को पत्रकारों की नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
डायरेक्टर श्री गौतम ने ‘पीपी सिंह: व्यक्तित्व एक, प्रभाव अनेक’ विषय पर पीपी सर के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने उनके पत्रकारिता दृष्टिकोण, जीवन मूल्यों और लोगों को साथ लेकर चलने की क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पीपी सर का प्रभाव केवल उनके लिखे शब्दों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने अपने साथ काम करने और सीखने वाली पूरी पीढ़ी को पत्रकारिता के संस्कार दिए।
कार्यक्रम में बुंदेली बौछार के संस्थापक एवं संपादक सचिन चौधरी ने ‘डिजिटल दौर: क्षेत्रीय मीडिया में उद्यमिता के अवसर’ विषय अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों ने क्षेत्रीय और स्थानीय पत्रकारिता के लिए नए रास्ते खोले हैं। छोटे शहरों और स्थानीय भाषाओं की खबरों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंच बनाने का जरिया बन गए हैं, जिसने पत्रकारिता में आत्मनिर्भरता के द्वार खोले हैं।
वर्तमान समय में मोबाइल का सदुपयोग करते हुए 5 हजार से अधिक इंफ्लुएंसर्स बुंदेली बोली में कंटेंट तैयार कर रहे हैं। लेकिन बदलते दौर में नई तकनीक के साथ पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड से संबंध रखने के कारण पीपी सर से मेरा विशेष जुड़ाव था। बुंदेली बौछार को भी उनका स्नेह बराबर मिलता रहा।
विशेष संस्मरण सत्र में म.प्र. जनसंपर्क विभाग की पूर्व सहायक संचालक करुणा राजुरकर ने पीपी सर के आत्मीय व्यक्तित्व, संवेदनशील और मार्गदर्शक पक्ष पर प्रकाश डाला। वहीं, राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित समाजसेवी पूनम श्रोती ने कहा कि पीपी सर के पास हर मुश्किल परिस्थिति का हल था, जब भी किसी मुद्दे को लेकर उनसे मिली, उन्होंने कहा कि चिंता मत करो सब हो जाएगा। इस अवसर पर कार्यक्रम में मौजूद पूर्व विद्यार्थी, वरिष्ठ पत्रकारों और पीपी सर के सहकर्मियों ने उनके साथ बिताए अपने अनुभव साझा किए।
Pushpendra Pal Singh Foundation फाउंडेशन की अध्यक्ष शानू सिंह ने बताया कि फाउंडेशन का उद्देश्य पीपी सर की विचारधारा, पत्रकारिता के मूल्यों और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि पीपी सर की स्मृति को केवल आयोजन तक सीमित न रखते हुए इसे रचनात्मक गतिविधियों और नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा। कार्यक्रम में पीपी सर के पूर्व विद्यार्थी, पत्रकारिता, सामाजिक क्षेत्र और पीपी सर से जुड़े लोग उपस्थित रहे।









