ट्रेन टिकट बुक करते समय वेबसाइट का धीमा पड़ जाना, सीट उपलब्धता देखने में देरी या तत्काल टिकट के दौरान सर्वर का ओवरलोड होना लंबे समय से यात्रियों की सबसे बड़ी परेशानी रही है. अब भारतीय रेलवे इन समस्याओं को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है. रेलवे अपने लगभग 40 साल पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को हटाकर अत्याधुनिक क्लाउड आधारित तकनीक अपनाने की तैयारी कर रहा है. नए सिस्टम के लागू होने के बाद टिकट बुकिंग पहले की तुलना में कई गुना तेज होगी और यात्रियों को अपनी पसंद की सीट चुनने जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी.
बुकिंग और सीट जांच की क्षमता में बड़ा इजाफा
मौजूदा रिजर्वेशन सिस्टम वर्ष 1986 से लगातार सेवाएं दे रहा है. इसी प्लेटफॉर्म के जरिए रेलवे आरक्षण केंद्र, IRCTC वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर टिकट बुकिंग होती है. देश में होने वाली अधिकांश ऑनलाइन टिकट बुकिंग इसी सिस्टम के माध्यम से संचालित होती है. हालांकि बढ़ती यात्री संख्या और डिजिटल सेवाओं की मांग को देखते हुए इसकी क्षमता अब सीमित पड़ने लगी है.
रेलवे के अनुसार वर्तमान सिस्टम एक मिनट में लगभग 32 हजार टिकट बुक कर सकता है. नई क्लाउड तकनीक लागू होने के बाद यह क्षमता बढ़कर करीब 1.5 लाख टिकट प्रति मिनट तक पहुंच जाएगी. वहीं सीट उपलब्धता की जांच करने की क्षमता भी 4 लाख से बढ़कर 40 लाख रिक्वेस्ट प्रति मिनट हो जाएगी. इसका सबसे अधिक फायदा त्योहारों, छुट्टियों और अन्य व्यस्त सीजन में मिलेगा, जब टिकटों की मांग अचानक कई गुना बढ़ जाती है.
यात्रियों को मिलेगी पसंदीदा सीट चुनने की सुविधा
नई व्यवस्था में यात्रियों को पहली बार बस और एयरलाइन बुकिंग की तरह सीट चुनने का विकल्प मिलेगा. यदि किसी को खिड़की वाली सीट चाहिए या परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठना चाहते हैं, तो वे उपलब्ध सीटों में से अपनी पसंद के अनुसार चयन कर सकेंगे. इससे यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक और आरामदायक बनेगी. इसके अलावा दिव्यांग यात्रियों और गंभीर मरीजों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विशेष सुविधाएं भी जोड़ी जाएंगी. टिकट बुकिंग प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सिस्टम में कई भारतीय भाषाओं का समर्थन भी दिया जाएगा.
रेलवन ऐप बनेगा नई व्यवस्था का केंद्र
रेलवे की नई डिजिटल व्यवस्था में RailOne ऐप अहम भूमिका निभाएगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित यह ऐप वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की संभावनाओं का अनुमान भी यात्रियों को बताएगा. इससे यात्रा की योजना बनाना पहले से अधिक आसान होगा. रेलवे का मानना है कि क्लाउड आधारित आधुनिक तकनीक अपनाने के बाद टिकट बुकिंग प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और अधिक भरोसेमंद बनेगी. इससे यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा और ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान आने वाली तकनीकी परेशानियां काफी हद तक समाप्त हो जाएंगी.









