रीवा/अरविन्द तिवारी/खबर डिजिटल/ रीवा जिले का बहुचर्चित सहकारिता घोटाला मामले में कई आरोपियों को पकड़ा गया था, कई स्वतंत्र रूप से आज भी घूम रहे हैं, ईमानदारी का चोला ओढ़कर भ्रष्टाचारी अधिकारी आज भी बड़े पदों में बैठे मिल जाएंगे, सहकारिता विभाग के धान खरीदी में खूब लेनदेन चला, लोगों ने मनमाने तरीके से अपना-अपना खरीदी केंद्र लिया है, कई खरीदी केंद्र के समूह संचालक ने खरीदी शुरू होने के पूर्व ही व्पारियो की धान खरीद रखी है, जैसे ही धान खरीदी शुरू हुई, अपना माल पहले जमा कराने की जुगत बैठाई गई है, जिसके पीछे एक सवाल बनता है कि आखिर सरकारी मंडी मनगवां को क्यूं नहीं बनाया जाता।
अस्तित्व विहीन होती करोड़ों की मनगवां मंडी
रीवा जिले की चर्चित विधानसभा मनगवां मुख्यालय में लगभग दस एकड़ में सहकारी मंडी निर्मित है, पूर्व में खरीदी भी होती रही है, परंतु कुछ वर्षो से मनगवां मंडी को नजर सी लग गई है, आसपास के वेयर हाउस में खुले मैदान में स्कूल के मैदान में धान की खरीदी कराई जाती हैं, परंतु सर्व सुविधा युक्त मंडी मनगवां में खरीदी नही कराई जाती है, जिसके पीछे भ्रष्टाचार की साजिश साफ नजर आ रही है।
आखिर ऐसा क्यूं
गल्ला मंडी मनगवां अपने अस्तित्व को खोता जा रहा है, क्या किसी भी अधिकारी की निगाह इस तरफ नही जाती है कि शासन द्वारा करोड़ों रुपए लगाकर गल्ला मंडी निर्मित कराई गई थी, और आज उसे छोड़कर प्राइवेट मंडी में अपनी धान खरीदी कर रहे है, जिसको लेकर आने वाले वक्त में आवाज उठने की पूरी संभावना जताई जा रही है।









