रीवा/अरविन्द तिवारी/खबर डिजिटल/ एक ओर शासन राजस्व बढ़ाने और खनन कार्यों को सुव्यवस्थित करने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है। रीवा जिले की जवा तहसील के घूमन गांव में पत्थर खनन का कार्य असामाजिक तत्वों के आतंक के चलते पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है।
10 सालों की मिली विधिवत अनुमति
प्राप्त जानकारी के अनुसार लीजधारी राजेश बहादुर सिंह को शासन द्वारा उसकी ही भूमि पर 10 वर्षों तक पत्थर खनन करने की विधिवत अनुमति दी गई है। इसके बावजूद नशे में धुत असामाजिक तत्व लगातार खनन कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। जैसे ही खनन का काम शुरू होता है, ये तत्व मौके पर पहुंच जाते हैं और गाली-गलौज, धमकी और डराने-धमकाने का सिलसिला शुरू कर देते हैं।
मजदूर छोड़ रहे काम
हालात ऐसे बन जाते हैं कि मजदूर दहशत में आकर काम छोड़कर भाग जाते हैं, जिससे पूरा खनन कार्य बंद हो जाता है। लीजधारी का कहना है कि उसने इस संबंध में प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
प्रशासन की उदासीनता उजागर
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब शासन का स्पष्ट आदेश और वैध अनुमति मौजूद है, तो फिर उसे जमीन पर लागू कराने में प्रशासन की उदासीनता क्यों दिखाई दे रही है? खनन कार्य बंद होने से न सिर्फ लीजधारी को आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि शासन को भी लाखों रुपये के राजस्व से वंचित होना पड़ रहा है।
लीजधारी ने की प्रशासन से मांग
पीड़ित लीजधारी ने प्रशासन से मांग की है कि असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर खनन कार्य को निर्बाध रूप से शुरू कराया जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक आंखें मूंदे बैठा रहता है और कब घूमन गांव में फैले नशेड़ी तत्वों पर लगाम लगाई जाती है।









