ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े मामले में सीबीआई ने करीब 600 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है. जांच एजेंसी ने उनके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगाए हैं. हालांकि, ये सभी आरोप फिलहाल जांच एजेंसी के दावे हैं और अदालत में इनकी सुनवाई बाकी है.
मौत से पहले की आखिरी रात
सीबीआई के मुताबिक, 12 मई की रात ट्विशा ने अपनी भाभी को बेहद परेशान करने वाला मैसेज भेजा था. इसके कुछ देर बाद वह घर की छत की तरफ जाती CCTV में नजर आईं. करीब 9:41 बजे उन्होंने पिता को फोन कर पति के कथित आक्रामक व्यवहार की जानकारी दी और परिवार से जल्द आने की बात कही.
करीब 10:05 बजे उन्होंने मां से भी इसी तरह बात की, लेकिन बातचीत अचानक खत्म हो गई. जांच एजेंसी के अनुसार, रात 10:23 बजे समर्थ और उनकी मां को भी छत की ओर जाते देखा गया. बाद में ट्विशा को अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 10:55 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.
शादी के बाद बिगड़ने लगे रिश्ते
सीबीआई के अनुसार, ट्विशा और समर्थ की मुलाकात फरवरी 2025 में एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी. दोनों ने उसी साल 9 दिसंबर को शादी की थी. शादी के कुछ समय बाद ही रिश्ते में तनाव बढ़ने लगा. ट्विशा पर कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियां की जाती थीं और उनके पुराने रिश्तों को लेकर भी सवाल उठाए जाते थे.
प्रेग्नेंसी और पैसों का विवाद
चार्जशीट में प्रेग्नेंसी से जुड़े विवाद का भी जिक्र है. 16 अप्रैल को ट्विशा को अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में पता चला था. सीबीआई के मुताबिक, वह इसे लेकर मानसिक दबाव में थीं. बाद में उन्होंने गर्भपात की प्रक्रिया शुरू की. जांच एजेंसी ने करीब 20 लाख रुपये के निवेश को लेकर विवाद का भी उल्लेख किया है. आरोप है कि ट्विशा पर यह रकम जॉइंट अकाउंट में ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जा रहा था.
परिवार से मदद मांगती रहीं
चार्जशीट के मुताबिक, ट्विशा ने कई बार अपनी मां और भाभी से उन्हें भोपाल से वापस ले जाने की गुहार लगाई थी. उन्होंने कथित तौर पर पति के व्यवहार, घर में निगरानी और लगातार बढ़ते तनाव की शिकायत भी की थी. सीबीआई ने WhatsApp चैट, कॉल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, मेडिकल जानकारी और परिवार के बयानों को जांच का हिस्सा बनाया है. एजेंसी का दावा है कि इन सबूतों से घटनाओं की पूरी कड़ी सामने आती है. फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की न्यायिक जांच होना बाकी है और अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही आरोपों की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी.








