MP Congress: मध्यप्रदेश कांग्रेस के अंदर इस समय इतिहास का सबसे बड़ा भूकंप आया हुआ है। बिना चुनाव लड़े राज्यसभा की एक सुरक्षित और जीती-जितायी सीट BJP की झोली में परोसने के ब्लंडर के बाद राष्ट्रीय कांग्रेस आलाकमान आक्रामक मोड में है। दिल्ली सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व इस विधिक लापरवाही को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन में बदलाव करने की तैयारी कर चुका है। सूत्रों का दावा है कि पीसीसी चीफ जीतू पटवारी की छुट्टी होना लगभग तय है और उनके साथ नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को भी पद से हटाया जा सकता है। दोनों ही बड़े नेताओं को बेहद सख्त लहजे में दिल्ली तलब किया जा रहा है, जहां उनसे सीधे इस्तीफे की मांग की जा सकती है।
डमी फॉर्म न भरना बना गुनाह
आलाकमान इस बात से सबसे ज्यादा नाराज है कि मध्य प्रदेश नेतृत्व ने बीजेपी के प्रत्याशी को बिना किसी विधिक मुकाबले के निर्विरोध संसद पहुंचने का रास्ता साफ कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े चुनाव में मुख्य उम्मीदवार के साथ एक डमी फॉर्म दाखिल कराया जाता है, ताकि मुख्य फॉर्म में कोई गलती होने पर पार्टी की दावेदारी बची रहे। प्रदेश कांग्रेस ने किसी भी नेता का फॉर्म दाखिल नहीं कराया, जिसे केंद्रीय नेतृत्व ने एक बड़ी चूक माना है।
क्यों नही ली वकीलों से राय?
मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा नामांकन की अंतिम तारीख से पूरे चार दिन पहले ही एआईसीसी ने कर दी थी। इसके बावजूद पीसीसी मुख्यालय, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और नेता प्रतिपक्ष कार्यालय ने फॉर्म की बारीकियों को री-चेक करने के लिए विशेषज्ञों की राय नहीं ली।दिल्ली दरबार का मानना है कि जीतू पटवारी, उमंग सिंघार और हरीश चौधरी की तालमेल का अभाव रहा, जिसका खामियाजा पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर भुगतना पड़ा है।
नए चेहरों की तलाश शुरू
राजनैतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि दिल्ली बुलाए जाने पर पटवारी और सिंघार आलाकमान को सफाई सौंपेंगे, लेकिन सूत्रों का कहना है कि आलाकमान अब किसी भी बहाने को सुनने के मूड में नहीं है। पीसीसी चीफ के पद के लिए मालवा और महाकौशल के कुछ पुराने दिग्गजों के नामों पर विचार शुरू हो गया है, जबकि नेता प्रतिपक्ष के लिए किसी सीनियर और समझ रखने वाले विधायक की कमान सौंपी जा सकती है।
हितेश वाजपेयी का बयान
प्रदेश भाजपा नेता हितेश वाजपेयी ने अपने सोशल मीडिया पर मामले को लेकर लिखा है कि दिग्विजय सिंह निःसंदेह मध्य प्रदेश के 10 वर्ष मुख्यमंत्री रहे हैं, कांग्रेस के वह एक वरिष्ठ नेता हैं और राष्ट्रीय पटल पर कांग्रेस के एक मजबूत हस्ताक्षर भी हैं। इस सब के बावजूद जिस प्रकार से हरीश चौधरी ने दिग्विजय सिंह का मीडिया के सामने मंच पर जो अपमान किया है वह बहुत ही सस्ता व्यवहार उन्होंने किया है जो की निंदनीय है तथा किसी भी कीमत पर इसको मध्यप्रदेश द्वारा बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
हितेश वाजपेयी ने आगे लिखा है कि मुझे लगता है कि कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व शीघ्र ही हरीश चौधरी को और जीतू पटवारी को उनके इस घृणित व्यवहार को लेकर उनके पदों से मुक्त करेंगे ऐसी खबरें आ रही हैं और यदि ऐसा होता है तो वाकई में यह ठीक होगा क्योंकि हमारे चाहे जितने भी राजनीतिक मतभेदों के बावजूद भी दिग्विजय सिंह का इस प्रकार सार्वजनिक अपमान कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी को नहीं करना था।









