डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ कहते हैं कि पिता के लिए सबसे बड़ा बोझ बेटे की अर्थी उठाना होता है। डिंडौरी जिले के ग्राम किसलपुरी में बुधवार की सुबह एक ऐसा ही दुःखों का पहाड़ सतीश पाठक के परिवार पर टूट पड़ा। जिस बेटे को बड़े अरमानों से पढ़ा-लिखाकर इंजीनियर बनाया था, उसी इकलौते बेटे सौरभ पाठक उम्र 30 वर्ष ने जिंदगी की जंग से हार मानकर खौफनाक कदम उठा लिया।
सुबह की ताजी हवा में वॉक से लौटे सौरभ ने जब अपने सो रहे पिता को जगाकर धीमी आवाज में कहा— “पापा, मैंने जहर खा लिया है…” तो पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। बदहवास परिजन उसे तुरंत लेकर जिला अस्पताल भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जब उसे मृत घोषित किया, तो अस्पताल का परिसर परिजनों की चीखों से दहल उठा।
परिजनों के अनुसार, खुशियों से भरे इस घर पर किसी की नजर लग गई थी। दिसंबर 2025 में बुढ़ार, शहडोल की काजल उर्फ नैना के साथ सौरभ का विवाह हुआ था। पिता सतीश पाठक ने रुंधे गले से बताया कि शादी के कुछ समय बाद से ही बहू का व्यवहार बदल गया था और वह बेटे को मानसिक रूप से परेशान करने लगी थी।
बीती 3 मई को पत्नी अपने भाई के साथ मायके चली गई और फिर कभी लौटकर नहीं आई। सौरभ और उसका परिवार गिड़गिड़ाता रहा, पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की मिन्नतें करता रहा, लेकिन बहू ने आने से साफ इनकार कर दिया। रिश्तों में आई इस कड़वाहट और मानसिक तनाव ने धीरे-धीरे सौरभ की हंसती-खेलती जिंदगी की खुशियां छीन लीं।
घटना के बाद से ही पूरे गांव में शोक की लहर फैली हुई है। कोतवाली पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब सौरभ के मोबाइल, व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड्स को खंगाल रही है, ताकि उस आखिरी मोड़ और मानसिक तनाव की पूरी सच्चाई सामने आ सके, जिसने एक होनहार इंजीनियर को जिंदगी खत्म करने पर मजबूर कर दिया।









