एनजीटी में फंसी धनलक्ष्मी — एक माह बाद भी कटनी में ‘रेत कारोबार’ चालू!
स्थानीय अधिकारियों के संरक्षण में चल रहा खेल
सुमित सेठ के सिंडिकेट के आगे सब नतमश्तक
कटनी – रेत खदान सरेंडर किये करीब एक महीना बीत गया, लेकिन धनलक्ष्मी मर्चेंडाइज प्रा. लि. (डीएमपीएल) का कारोबार ठंडा नहीं पड़ा।
कंपनी को अब भी ETP (इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसपोर्ट परमिट) जारी हो रहे हैं और वह जिले में खुलेआम रेत का भंडारण और परिवहन कर रही है।दरअसल स्थानीय अधिकारियों के संरक्षण में यह खेल चल रहा है। वही स्थानीय रेत सिंडिकेट का कर्ताधर्ता सुमित सेठ हैं। जिसके पैसे और राजनीतिक पहुँच के आगे सब नतमश्तक हैं
अब बड़ा सवाल यह कि — आखिर कंपनी के पास भंडारण कितना था, जो महीनों बाद भी खत्म नहीं हो रहा?और सरेंडर के बाद ETP जारी करने की अनुमति किसने दी, जबकि कंपनी ने इसके लिए कोई नया आवेदन तक कलेक्टर को नहीं दिया है?
NGT पहुंचने के बाद ‘भाग खड़ी हुई’ कंपनी
याद रहे, पर्यावरण कार्यकर्ता खुशी बग्गा की याचिका (मूल आवेदन क्र. 126/2025 सीजेड) पर एनजीटी ने हाल ही में गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघनों की जांच के आदेश दिए हैं।
बग्गा ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने उमरार, महानदी, हलफल और बेलकुंड नदियों में बिना पर्यावरण स्वीकृति और बिना वैध पट्टे के रेत खनन किया।
भारी मशीनों से खनन कर नदियों का प्रवाह मोड़ा गया, किनारे टूटे, भूजल स्तर गिरा और आसपास की फसलें-मछलियां प्रभावित हुईं।
सरेंडर स्वीकार नहीं, तो फिर कैसे टेंडर
जवाब देने की बजाय कंपनी ने सरेंडर आवेदन झोंक दिया — यानी “नदी खोद दी, अब निकलते हैं!”
लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। माइनिंग विभाग कह रहा है कि कंपनी की देनदारियों के चलते सरेंडर स्वीकार नहीं हुआ।
तो सवाल यह है कि अगर सरेंडर स्वीकार नहीं हुआ, तो नई कंपनी के लिए टेंडर प्रक्रिया कैसे शुरू कर दी गई? क्या पुराने गुनाहों को धोने की तैयारी चल रही है?
जांच समिति गठित
एनजीटी ने इस पर संयुक्त जांच समिति गठित की है, जिसमें केंद्रीय व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण विशेषज्ञ शामिल हैं।
समिति को छह सप्ताह में रिपोर्ट देना है। मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर 2025 को होगी।


