सिवनी/विशाल भारद्वाज/खबर डिजिटल/ बालाघाट पुलिस थाने के मालखाने में हुए गबन की राशि के मामले में प्रधान आरक्षक योगेश राजपूत से पूछताछ करने के लिए बालाघाट पुलिस पहुंची थी।इस दौरान बालाघाट पुलिस से गाली गलौज और झूमा-झपटी की घटना हो गई। अब इस मामले में सिवनी कोतवाली में बालाघाट पुलिस के द्वारा आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है। जिसमें कुछेक लोगों की गिरफ्तार किया जा चुका है, वहीं कुछ लोग फरार बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही करोड़ों रुपए के लूट कांड मामला उठाने वाले पत्रकारों पर भी मामला दर्ज किया गया है, जबकि वह अधिमान्य पत्रकार है, फिर भी बिना जांच के उन पर एफआईआर दर्ज कर ली गई। पत्रकारों के ऊपर मामला दर्ज करना पुलिस की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल बालाघाट के मालखाने से 55 लाख रुपये की राशि के गबन के मामले में बालाघाट पुलिस सिवनी के एक जुआरी के बयान पर सिवनी में पदस्थ रहे प्रधान आरक्षक योगेश राजपूत के घर पहुंची थी, जहां प्रधान आरक्षक के द्वारा अपने अधीनस्थ लोगों को बुलाकर बालाघाट पुलिस के साथ कार्यवाही के दौरान गाली-गलौच और झूमा-झपटी की गई। जिसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद बालाघाट पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर प्रधान आरक्षक योगेश राजपूत, उसका छोटा भाई ब्रजेश राजपूत सहित सहयोगी 8 लोगों के खिलाफ नामजद और 8 अज्ञात के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने सहित अन्य धाराओं में भी एफआईआर दर्ज की गई है।
पुराना मामला क्या है?
आरक्षक योगेश राजपूत ने अपने पत्र में छिंदवाड़ा जोन के डीआईजी राकेश सिंह और सिवनी के शराब व्यापारी संजय भारद्वाज के ऊपर खुद को झूठे आरोप में फ़साने का उल्लेख किया था। जिसकी खबर प्रमुखता से दिखाई गई थी. हालांकि अभी तक योगेश राजपूत लापता बताए जा रहे हैं, जिसकी बालाघाट पुलिस और सिवनी पुलिस तलाशी में लगी हुई है।


