खंडवा/हरेंद्रनाथ ठाकुर/खबर डिजिटल/ अक्सर कहा जाता है….“नेकी कर दरिया में डाल”, लेकिन खंडवा नगर निगम ने इस कहावत को नए अंदाज में बदलते हुए एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा पूरे शहर में हो रही है। नगर निगम ने अपने कार्यों से यह साबित किया कि यदि नेक इरादा हो तो प्रशासनिक सख्ती भी मानवीयता का चेहरा दिखा सकती है। निगम ने अवैध ठेलों से जप्त किए गए फलों को फेंकने के बजाय गरीबों और जरूरतमंदों में बांटकर “नेकी कर गरीबों में बाँट” जैसी नई सोच की शुरुआत की है। नगर निगम परिसर के मुख्य द्वार पर लंबे समय से ठेले चालक अपने ठेले लगाकर फल बेच रहे थे। इससे नगर निगम में आने-जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। कई बार नगर निगम प्रशासन ने इन ठेले चालकों को चेतावनी दी कि वे मुख्य द्वार से हट जाएं, लेकिन बार-बार चेतावनी देने के बावजूद जब कोई असर नहीं हुआ, तब निगम आयुक्त प्रियंका राजावत के निर्देश पर सख्त कार्रवाई की गई।
गुरुवार को नगर निगम की टीम ने चलाया बड़ा अभियान
गुरुवार को निगम की टीम ने अतिक्रमण को लेकर अभियान चलाकर नगर निगम मुख्य द्वार पर लगे ठेले जब्त कर लिए। कार्रवाई के दौरान कई ठेले चालक घबराकर मौके से भाग निकले और अपने ठेलों पर रखा सारा सामान वहीं छोड़ गए। निगम ने सभी ठेलों पर रखे सेब, केला, अमरूद जैसे विभिन्न फलों को सुरक्षित रख लिया। सामान्यतः ऐसी स्थिति में जप्त सामग्री नष्ट कर दी जाती है, लेकिन इस बार नगर निगम ने अलग रास्ता चुना।
निगम के फैसले ने जीता लोगों का दिल
खंडवा नगर निगम आयुक्त प्रियंका राजावत के निर्देश पर इन जप्त फलों को जरूरतमंदों के बीच वितरित किया गया। निगम कर्मचारियों ने अस्पताल, वृद्धाश्रम, अनाथालय, नेत्रहीन संगठन कार्यालय और केशव धाम जाकर इन फलों को वहां मौजूद मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों के बीच बाँटा। जहां भी निगम की टीम पहुंची, वहां लोगों के चेहरों पर मुस्कान दिखाई दी। निगम के इस मानवीय कदम ने शहरवासियों का दिल जीत लिया। सोशल मीडिया पर भी नगर निगम की इस पहल की जमकर सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि प्रशासन सख्ती के साथ संवेदनशीलता भी दिखा सकता है, यह इसका उदाहरण है। कुछ लोगों ने कहा की “अगर हर सरकारी कार्रवाई में मानवता का स्पर्श जुड़ जाए, तो समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा।”
निगम आयुक्त ने सख्त लहजे में अतिक्रमकारीयों को दी चेतावनी
खंडवा नगर निगम आयुक्त प्रियंका राजावत ने बताया कि हमारा उद्देश्य किसी की रोजी-रोटी छीनना नहीं है। लेकिन अतिक्रमण से जनता को असुविधा होती है। हमने कई बार समझाया, फिर भी जब कोई सुधार नहीं हुआ, तब यह कार्रवाई करनी पड़ी। पर हमने यह भी सुनिश्चित किया कि जप्त फल बर्बाद न हों, बल्कि जरूरतमंदों तक पहुंचें। उन्होंने आगे चेतावनी दी कि अगर आगे भी ठेले चालक नगर निगम के मुख्य द्वार पर अतिक्रमण करते पाए गए, तो उनके खिलाफ और सख्त कदम उठाए जाएंगे। नगर निगम का यह अभियान फिलहाल जारी है और अधिकारियों का कहना है कि शहर के अन्य क्षेत्रों में भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होगी।
खंडवा नगर निगम की यह पहल अब एक मिसाल बन चुकी है। सख्ती के साथ संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का यह संगम बताता है कि प्रशासन यदि चाहे तो कानून का पालन कराते हुए भी समाज में “नेकी” बाँट सकता है।
