इंदौर/नरेंद्र महावर/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर की बात जब भी हुई, कोई बड़ा राजनेता यहां आता है, और उसको जायकों की तलाश होती है, तो सीधे एक ही नाम सामने आता है, पलासिया इलाके की 56 दुकान, क्योंकि यहां मिलते है, हाईजिन और जायकों से भरपूर व्यंजन। कहा जाता है कि इन दुकानों पर उपलब्ध स्वाद पूरे इंदौर में ढूंढे से नहीं मिलता, इसीलिये इन दुकानों पर पूरा शहर उमड़ पड़ता है, जिसे एक सुंदर तरीके से सजाया गया है।
क्या-क्या है 56 दुकान पर?
56 दुकान को लेकर कहा जाता है कि यहां पर रोजाना 50 लाख रुपये से ज्यादा का कारोबार होता है। इस बाजार में पानी-पताशे यानी गोलगप्पे, मसाला डोसा, उत्तपम, मोमोज, भुट्टे का कीस, गराडू, हॉट डॉग, बर्गर, कचोरी, समोसे, पोहे, खमण, आलू-छोले की टिकिया,सहित 100 से ज्यादा प्रकार के चटपटे व्यंजन यहां गरमा-गरम उपलब्ध हैं। इसके अलावा मावे, बंगाली, ड्राय फ्रूट्स सहित कई प्रकार की मिठाइयां उपलब्ध हैं। ऐसे ही मूंग दाल का हलवा, शिकंजी, फालूदा केसर आइस्क्रीम, विशेष प्रकार की चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स, आइसक्रीम सहित ढेरों आइटम 56 दुकानों पर स्वाद के चटोरों के लिए मिल जाएंगे। वहीं अब बाजार को जिस तरह से सजाया गया है वो भी अपने-आप में काबिलेतारीफ है, इसी का नतीजा है कि यहां लोग खाने के साथ घंटों वक्त बिताने को मजबूर हो जाते हैं।
56 दुकान का निराला इतिहास
बात साल 1974 की है, यह इलाका उदासीन आश्रम मार्केट के नाम से पहचाना जाता था। सिटी से दूर एक ग्रामीण परिवेश के समान दिखाई देने के वाले इस एरिया में बेतरतीब तरीके से सब्जी, फल और खाने-पीने के सामान के ठेले लगा करते थे। जिसे व्यवस्थित करने के लिए ठेलेवालों को 56 दुकानें बनाकर दी। तब भी यह मार्केट उदासीन आश्रम मार्केट ही कहलाता था। ठेलेवालों को दुकान 2500-2500 रुपये में दी गई थी, जोकि 6 बाय 6 की थी, ताकि उनका ठेला खड़ा हो जाए, लेकिन एक जगह धंधा नहीं करने की आदत के चलते ठेलेवाले बस रात में ठेला रखने के लिए इन दुकानों का उपयोग करने लगे। हालांकि कुछ दिनों बाद अन्य लोगों ने इन दुकानों को एक-एक कर खरीदा और स्वादिष्ट व्यंजनों की श्रृंखला पेश करना शुरु किया, जिसके चलते 1980 से 90 के बीच यह इंदौर की पहचान बन गया और लोग इसे 56 दुकान कहकर पुकारने लगे, जबकि इसके मूल नाम उदासीन आश्रम मार्केट को भूला दिया गया। साल 2000 में इसका पूरा कायापलट किया गया, सामने से जाने वाले रास्ते को बंद कर दुकानों को व्यवस्थित रुप दिया गया।
भारत का दूसरा क्लीन स्ट्रीट फूड हब
डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का मॉडल 56 दुकान के दुकानदारों ने ही शुरु किया था, जोकि आज देशभर में लागू किया गया है। डस्टबिन में कचरा फेंकने के लिए भी दुकानदारों ने प्रेरित करना शुरु किया, जोकि एक क्रांति के रुप में इंदौर शहर को नंबर वन का ताज पहना गया। यह भारत का दूसरा क्लीन स्ट्रीट फूड हब बना। महिलाओं के लिए पिंक यूरिनल, पहला बायो वेस्ट टॉयलेट, जीरो वेस्ट मार्केट सब यहीं हुआ। कोयले के तंदूर भी यहां इस्तेमाल नहीं किए जाते।
